Sindri News: पाथरडीह कोल वाशरी में जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट) का चक्का जाम, प्रबंधन की वादा खिलाफी के खिलाफ प्रदर्शन

पाथरडीह कोल वाशरी में जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट) का चक्का जाम

पाथरडीह कोल वाशरी में जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट) का चक्का जाम

Sindri News: बीसीसीएल की पाथरडीह कोल वाशरी में जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट) ने स्थानीय युवाओं के रोजगार और अन्य समस्याओं को लेकर प्रबंधन की वादा खिलाफी के खिलाफ चक्का जाम कर दिया। इस आंदोलन के कारण वाशरी का काम पूरी तरह ठप हो गया, जिससे कोल वाशिंग और कोयले की सप्लाई प्रभावित हुई।

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स्थानीय रोजगार और प्रदूषण पर नाराजगी

जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट) का कहना है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने, प्रदूषण नियंत्रण और अन्य मांगों को लेकर पहले भी कई बार प्रबंधन के साथ बैठक हुई थी, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही दिया गया। प्रबंधन की इस वादा खिलाफी के विरोध में मजबूर होकर श्रमिक संगठन ने चक्का जाम आंदोलन शुरू किया।

वाशरी का संचालन पूरी तरह ठप

पाथरडीह कोल वाशरी में रोजाना सैकड़ों टन कोयले की वाशिंग होती है और यहां से कोयला रैक और अन्य वाहनों के माध्यम से बाहर भेजा जाता है। लेकिन आज के आंदोलन के कारण वाशिंग का पूरा कार्य रुक गया। इससे कोल सप्लाई प्रभावित हो गई, जिससे कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट) के अध्यक्ष और सचिव का आरोप है कि बीसीसीएल और वाशरी का संचालन देख रही मोनेट इस्पात एनर्जी लिमिटेड मनमानी रवैया अपना रही हैं।

  • स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दिया जा रहा।
  • बाहर से लोगों को लाकर काम कराया जा रहा है।
  • जमीन देने वाले रैयत आज बेरोजगार बैठे हैं।
  • पूर्व में हुई बैठकों में प्रबंधन ने मांगों को पूरा करने की सहमति दी थी, लेकिन बार-बार वादाखिलाफी की जा रही है।

प्रबंधन की चुप्पी, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि आंदोलन से पहले सभी अधिकारियों को लिखित सूचना दी गई थी, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। जब तक प्रबंधन हमारी मांगों को पूरा नहीं करता, तब तक चक्का जाम जारी रहेगा।

प्रबंधन की चुप्पी, नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

इस पूरे मामले पर बीसीसीएल और मोनेट इस्पात के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि काम ठप होने से हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? आंदोलन के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से उद्योगों पर भी असर पड़ सकता है।

यह आंदोलन स्थानीय युवाओं के हक की लड़ाई को दर्शाता है और अब देखना यह होगा कि प्रबंधन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।