Love Beyond Religion and Gender: पुलिस से मांगी सुरक्षा, समाज से चाही स्वीकृति
Same-Sex Marriage in Hardoi | हरदोई में दो युवतियों की हिम्मतभरी प्रेम कहानी, परिजनों के विरोध के बावजूद थाने पहुंचकर रचाई इतिहास
Same-Sex Marriage in Hardoi | उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से Same-Sex Marriage in Hardoi का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समाज की सोच और परंपराओं को चुनौती दी है। यहां एक हिंदू और एक मुस्लिम युवती ने समाजिक बंदिशों को तोड़ते हुए आपस में विवाह करने का निर्णय लिया और इस रिश्ते को सुरक्षित बनाने के लिए शाहाबाद कोतवाली पहुंचीं। दोनों युवतियों ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की और बताया कि उन्हें परिजनों से लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
पुलिस के सामने रखी प्रेम कहानी, परिजनों के विरोध के बीच मांगी सुरक्षा
मंगलवार दोपहर, दोनों युवतियां शाहाबाद कोतवाली पहुंचीं और अपने रिश्ते को लेकर पुलिस को पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे समलैंगिक विवाह करना चाहती हैं लेकिन उनके परिवार इसका विरोध कर रहे हैं। पुलिसकर्मी भी इस असामान्य मामले को सुनकर चकित रह गए। कोतवाल ब्रजेश राय उस समय मौजूद नहीं थे, इसलिए मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया गया और युवतियों की काउंसलिंग शुरू की गई।
प्यार के आगे बौना पड़ा धर्म और जाति का बंधन
अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया कि मामला गंभीर है और इसे पूरी संवेदनशीलता से लिया जा रहा है। परिजनों को भी थाने बुलाया गया है ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। दोनों युवतियों ने स्पष्ट किया कि उनका प्यार धर्म और जाति की दीवारों से परे है, और वे एक-दूसरे के साथ जीवन बिताना चाहती हैं।
सामाजिक स्वीकृति और अधिकारों की मांग
इन युवतियों ने केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि अपने रिश्ते को सामाजिक मान्यता दिलाने की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि उनकी यह लड़ाई सिर्फ अपने प्यार के लिए नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए है जो समलैंगिक संबंधों में होते हुए भी सामाजिक दबाव के कारण खुलकर सामने नहीं आ पाते।
निष्कर्ष
Same-Sex Love Story in Hardoi: साहसिक कदम ने खोली सोच की नई राह
हरदोई की यह समलैंगिक प्रेम कहानी उन सभी रूढ़ियों को तोड़ती है जो आज भी समाज में गहरी जड़ें जमाए हुए हैं। इन युवतियों की हिम्मत और संकल्प आने वाले समय में ऐसे रिश्तों को लेकर समाज में स्वीकृति और समानता की दिशा में एक नई सोच को जन्म दे सकता है। पुलिस की भूमिका अब न केवल सुरक्षा तक सीमित है, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में भी है।
