Dhanbad News: बीसीसीएल और हिलटॉप कम्पनी के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा आक्रोश, जबरन भूमि अधिग्रहण को लेकर उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन

जबरन भूमि अधिग्रहण को लेकर उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन

जबरन भूमि अधिग्रहण को लेकर उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन

खरखरी और आस-पास के ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार, पुलिस पर दुरुपयोग के आरोप

सांसद प्रतिनिधि के नेतृत्व में ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन

Dhanbad News: आजसू पार्टी के धनबाद जिला प्रधान सचिव एवं सांसद प्रतिनिधि रामा शंकर तिवारी के नेतृत्व में खरखरी, बाबुडीह, ब्राह्मणडीहा समेत कई गांवों के रैयत और ग्रामीण सोमवार को धनबाद उपायुक्त, एसडीओ और एसएसपी से मिले। इस प्रतिनिधिमंडल ने बीसीसीएल और हिलटॉप आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा जबरन भूमि अधिग्रहण, नियोजन की अनदेखी और प्रशासनिक दुरुपयोग के खिलाफ ज्ञापन सौंपा।

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9 जनवरी की घटना से अब तक नहीं मिला न्याय

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 9 जनवरी को रैयतों की अनुमति और मुआवजा दिए बिना कंपनी ने जबरन जमीन पर काम शुरू किया था। इस विरोध के दौरान बाबुडीह जंगल क्षेत्र में बड़ी घटना घटी, जिसके बाद प्रशासन ने इलाके में धारा 144 लागू कर दी। लेकिन धारा हटने के बाद भी बिना किसी वैधानिक स्वीकृति और पर्यावरणीय मंजूरी के कार्य फिर से शुरू कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

प्रशासनिक दबाव और धमकियों की खुली शिकायत

ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी के कर्मचारी कार्य के विरुद्ध बोलने पर उन्हें पुलिस केस में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं। यह भी कहा गया कि काम अब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के रिश्तेदार की देखरेख में हो रहा है और जो भी विरोध करेगा, उस पर केस तय है। यह स्थिति ग्रामीणों के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है और प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाती है।

न्याय की उम्मीद में जिला प्रशासन और नेताओं से संपर्क

ग्रामीणों ने प्रशासन पर पक्षपात और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ अधिकारी जानबूझकर अवैध कार्यों में लिप्त कंपनियों का साथ दे रहे हैं। रैयतों की मांगों को अनसुना कर दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में गहरा असंतोष है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो और गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी से मिलकर हस्तक्षेप की मांग की है।

ग्रामीणों की दो टूक: जमीन देंगे नहीं, जान दे देंगे

ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि जब तक भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और नियोजन जैसे मुद्दों पर निष्पक्ष समाधान नहीं होता, वे अपनी जमीन किसी भी सूरत में नहीं देंगे—even if it means risking their lives. उनका यह संकल्प इस बात को दर्शाता है कि वे अब अन्याय के खिलाफ लामबंद हैं और लड़ाई को अंतिम मुकाम तक ले जाने को तैयार हैं।

निष्कर्ष

प्रशासनिक निष्क्रियता और कंपनी के मनमाने रवैये ने भड़काया जन आक्रोश

धनबाद में जबरन भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक दबाव की घटनाएं राज्य के कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती हैं। बीसीसीएल और हिलटॉप जैसी कंपनियों का बिना वैधानिक प्रक्रिया के काम शुरू करना और ग्रामीणों को धमकी देना लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या जिला प्रशासन और राज्य सरकार ग्रामीणों की इस पीड़ा को गंभीरता से लेकर कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह संघर्ष और भी उग्र रूप लेगा।