Dhanbad News: कोयलांचल में सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए प्रतिदिन हो रही 12 से 15 ट्रकों की अवैध निकासी
Dhanbad News: बीसीसीएल एरिया-3 में धड़ल्ले से चल रही कोयला तस्करी
Dhanbad News: कोयलांचल क्षेत्र में कोयला तस्करी की घटनाएं अब नई दिशा ले चुकी हैं। अब कोयला तस्करों की नजर सीधे आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा उत्पादित कोयले पर है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, बीसीसीएल के एरिया-3 के एक आउटसोर्सिंग पैच में प्रतिदिन रात के अंधेरे में 12 से 15 ट्रक कोयला चोरी से निकाला जा रहा है। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है और हैरानी की बात यह है कि इस पूरे रैकेट के पीछे एक बड़े सफ़ेदपोश नेता का हाथ बताया जा रहा है।
बजरंगी भाईजान की संदिग्ध भूमिका
इस गोरखधंधे में ‘बजरंगी भाईजान’ नामक व्यक्ति की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। फिलहाल इस नाम के पीछे की असलियत का खुलासा होना बाकी है, लेकिन क्षेत्र में चर्चा है कि वह इस अवैध तंत्र का एक अहम कड़ी है। आने वाले समय में इस पर भी विस्तार से बात की जाएगी, लेकिन वर्तमान में यह जानना जरूरी है कि यह सब हो कैसे रहा है।
CISF और बीसीसीएल की मौजूदगी के बावजूद कैसे हो रही चोरी?
बीसीसीएल क्षेत्रों और आउटसोर्सिंग परियोजनाओं में कोयला चोरी रोकने के लिए औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की भारी तैनाती की गई है। इन व्यवस्थाओं पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा, बीसीसीएल के अधिकारी भी इन कंपनियों की गतिविधियों पर निगरानी रखते हैं। बावजूद इसके, बिना वैध कागजात के प्रतिदिन दर्जनों ट्रक कोयले का यूं चोरी हो जाना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
संगठित तंत्र: तय है हर टन कोयले का ‘हिस्सा’
इस अवैध कारोबार में ‘हिस्से का खेल’ पूरी तरह से तय किया गया है। क्षेत्र विशेष के अनुसार, प्रति टन कोयले का हिस्सा किसको कितना मिलेगा, इसकी गणना पहले से की जाती है। यहां तक कि प्रत्येक इलाके के लिए अलग-अलग ‘मुनीमजी’ की तैनाती की गई है, जो इस काले धन के हिसाब-किताब को संभालते हैं।
“हींग लगे न फिटकिरी” वाली तस्करी का नया तरीका
कोयलांचल में पुराने समय से बंद पड़े रास्तों को फिर से खोल कर कोयला चोरी की खबरें आम थीं, लेकिन अब सीधे आउटसोर्सिंग कंपनियों से कोयला टपाया जाना वाकई चौंकाने वाला है। यह ऐसा अपराध है जिसमें न गोली चलती है, न शोर होता है, पर करोड़ों का नुकसान होता है – सही मायने में “हींग लगे न फिटकिरी, रंग चोखा”।
निष्कर्ष
सरकार और प्रशासन को देनी होगी जवाबदेही
प्रतिदिन इस तरह राष्ट्र की संपत्ति को चुराया जाना न सिर्फ आर्थिक नुकसान है, बल्कि सुरक्षा और प्रशासनिक विफलता का संकेत भी है। अब समय आ गया है कि बीसीसीएल, प्रशासन और सरकार इस पर ठोस कदम उठाएं और इस संगठित तंत्र को तोड़ने की दिशा में कार्रवाई करें। वरना कोयलांचल का यह अंधेरा कभी उजाले में नहीं बदलेगा।
