रणधीर वर्मा चौक पर धरना सभा, शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि और सरकार को चेतावनी
बांग्ला भाषा के सम्मान और अधिकार के लिए उठी एकजुट आवाज
Dhanbad News: बांग्ला भाषा अधिकार आंदोलन को लेकर 19 मई को झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति की धनबाद नगर कमेटी द्वारा रणधीर वर्मा चौक पर एक जोरदार विरोध सभा का आयोजन किया गया। यह सभा भाषा आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ सरकार की भाषा नीति के विरोध में थी, जिसमें बांग्ला भाषा और पाठ्यपुस्तकों को शिक्षा व्यवस्था से बाहर रखने की तीखी आलोचना की गई।
शहीदों को नमन, भाषा नीति पर विरोध
सभा की शुरुआत शिलचर भाषा आंदोलन के शहीदों को नमन करते हुए की गई, जिनके बलिदान की वजह से बांग्ला भाषा को असम के शिलचर क्षेत्र में मान्यता प्राप्त हुई थी। वक्ताओं ने वर्तमान झारखंड सरकार पर आरोप लगाया कि वह शिक्षा व्यवस्था में बांग्ला भाषा की उपेक्षा कर रही है, जिससे बंगाली समाज आहत है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के नाम बदलने पर विरोध
सभा में वक्ताओं ने हाल ही में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के नाम में किए गए बदलाव को भी बंगाली समुदाय का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाली अस्मिता पर हमला है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार को दी चेतावनी, आंदोलन की दी गई चेतावनी
बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित हुआ कि यदि सरकार ने जल्द ही बांग्ला भाषा को शिक्षा में उचित स्थान नहीं दिया, तो बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह चेतावनी सरकार को जगाने के लिए दी गई है ताकि वह बांग्ला भाषियों की भावनाओं का सम्मान करे और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे।
अनेक गणमान्य लोगों की रही भागीदारी
धरना सभा में कई प्रमुख बांग्ला भाषा प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इनमें श्री बेगूं ठाकुर, नगर अध्यक्ष सुजीत रंजन, सचिव पार्थ सारथी दत्ता, राज्य उपसभापति भवानी बंदोपाध्याय, गोविंदों ठाकुर, अशोक कुमार दास, नारायण चंद्र पाल, श्यामल रॉय, समीर सरकार, शिबू चक्रवर्ती, बिकास, सुमन चक्रवर्ती, मुकुल कुमार, दीपक चौधरी, जामिनी पाल, अनिल चंद्र कुंभकार, मुकुल गोस्वामी, प्रणब कुमार देव, शांतनु चौधरी, उज्ज्वल बनर्जी, पी. भट्टाचार्य, शिबनाथ महतो, श्रेयसी बनर्जी और रंगनायिका मंडल जैसे नाम शामिल रहे।
निष्कर्ष
बांग्ला भाषा की रक्षा के लिए समुदाय एकजुट, शिक्षा में समावेश की मांग प्राथमिकता
बांग्ला भाषा अधिकार आंदोलन केवल भाषाई हक की लड़ाई नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का अभियान बन चुका है। धनबाद में आयोजित यह विरोध सभा यह दर्शाता है कि बंगाली समाज अपनी भाषा और अस्मिता के लिए एकजुट है और वह किसी भी तरह की उपेक्षा को चुपचाप सहन नहीं करेगा। अगर सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।
