धनबाद जेल निरीक्षण: न्यायिक टीम ने की औचक जांच
धनबाद जेल निरीक्षण: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA) के निर्देश पर धनबाद के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के चेयरमैन वीरेंद्र कुमार तिवारी ने शुक्रवार को धनबाद मंडल कारा का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरती माला एवं अवर न्यायाधीश सह सचिव मयंक तुषार टोपनो भी उपस्थित थे। निरीक्षण का उद्देश्य जेल में बंदियों को उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।
कुल बंदियों की संख्या और स्थिति
निरीक्षण के दौरान जेल में कुल 652 बंदी पाए गए, जिनमें से 68 दोषसिद्ध और 584 विचाराधीन कैदी थे। इनमें 27 महिलाएं भी शामिल थीं। न्यायाधीश तिवारी ने सभी बैरकों का दौरा करते हुए कैदियों से उनके स्वास्थ्य, भोजन, स्वच्छता, इलाज और मुकदमों में पैरवी की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष फोकस
न्यायाधीश ने कारागार में स्वच्छता की स्थिति की विशेष समीक्षा करते हुए शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। जेल अस्पताल में भर्ती बीमार कैदियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु उन्हें उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित करने का आदेश भी दिया गया।
महिला बंदियों की समस्याओं पर ध्यान
महिला बैरक में निरुद्ध 27 महिला कैदियों से मुलाकात कर न्यायाधीश ने उनकी समस्याएं सुनीं। महिला बंदियों की सुविधा हेतु जेल में सेनेटरी पैड मशीन लगाने का निर्देश दिया गया। साथ ही, महिला बंदियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई।
शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए दिशा निर्देश
पढ़ाई में रुचि रखने वाले कैदियों के लिए उचित शिक्षा की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, कल्याणपरक, शिक्षापरक एवं रोजगारपरक शिविरों के आयोजन द्वारा बंदियों को प्रशिक्षण देने का आदेश भी प्रभारी जेलर को दिया गया।
तकनीकी सुधार की पहल
जेल में स्कैनर के समुचित उपयोग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में बंदियों की पेशी सुनिश्चित करने हेतु हाईटेक उपकरणों की व्यवस्था के निर्देश दिए गए। साथ ही सभी बंदियों का अद्यतन डेटा विधिक स्वयंसेवकों के माध्यम से कंप्यूटर पर फीड कराने की बात कही गई।
सुविधाओं की व्यापक समीक्षा
न्यायाधीश ने जेल परिसर में उपलब्ध पुस्तकालय, रसोईघर, ध्यान-सह-योग केंद्र, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र और भोजन व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि कैदियों को जेल मैनुअल के अनुसार सभी आवश्यक सुविधाएं दी जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
अधिकारियों की सहभागिता
इस निरीक्षण के दौरान रजिस्ट्रार सिविल कोर्ट आई. जेड. खान, जेल डॉक्टर राजीव कुमार सिंह, भवन निर्माण विभाग के इंजीनियर, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ कुमार बिमलेंदु, डिप्टी चीफ अजय कुमार भट्ट, सुमन पाठक, नीरज गोयल, के. एल. ठाकुर, मुस्कान, पारा लीगल वालंटियर विशाल कुमार सिंह, डालसा सहायक अरुण कुमार, प्रभारी जेलर और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
निष्कर्ष
धनबाद मंडल कारा का यह औचक निरीक्षण बंदियों को मानवीय अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया के तहत समुचित सुविधाएं देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा दिए गए निर्देशों से न केवल जेल प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि बंदियों के पुनर्वास और सुधार की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे।
