Kiren Rijiju Blasts UPA Government: केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने यूपीए सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि संप्रग (UPA) सरकार के कार्यकाल में संसद को भी वक्फ संपत्ति बताया जा रहा था। उनका यह बयान वक्फ बोर्ड और उसकी संपत्तियों से जुड़े विवादों को लेकर आया है, जिसमें हाल के दिनों में कई खुलासे हुए हैं।
क्या कहा किरण रिजिजू ने?
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि “देश में वक्फ बोर्ड की शक्तियों को इतना बढ़ा दिया गया था कि संसद भवन जैसी संपत्तियों पर भी दावा ठोकने की नौबत आ गई थी।” उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान ऐसे कानून बनाए गए, जिससे वक्फ बोर्ड को मनमानी करने का अधिकार मिल गया था।
वक्फ बोर्ड पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
पिछले कुछ वर्षों में वक्फ बोर्ड से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं, जिनमें निजी और सरकारी संपत्तियों पर बोर्ड के दावे किए जाने की घटनाएं शामिल हैं। वक्फ अधिनियम के तहत बोर्ड को व्यापक अधिकार दिए गए थे, जिससे वह बिना किसी बड़ी कानूनी बाधा के संपत्तियों को वक्फ घोषित कर सकता था।
यूपीए सरकार के फैसले पर रिजिजू की आपत्ति
किरण रिजिजू ने यह भी कहा कि यूपीए सरकार के दौरान बनाए गए कानूनों ने वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दीं, जिसके चलते कई निजी और सरकारी संपत्तियों पर कब्जे के मामले सामने आए। उन्होंने कहा कि संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर कोई पारदर्शिता नहीं थी और सरकार के संरक्षण में वक्फ बोर्ड अपनी मनमानी करता रहा।
क्या है वक्फ संपत्ति विवाद?
वक्फ बोर्ड के पास देशभर में लाखों एकड़ जमीन है, जो सार्वजनिक और निजी संपत्तियों से जुड़ी है।
कई बार विवाद हुआ है कि वक्फ बोर्ड ने निजी जमीनों को भी अपनी संपत्ति घोषित कर दिया।
सरकार अब इस कानून में संशोधन कर वक्फ बोर्ड की मनमानी पर रोक लगाने की तैयारी में है।
सरकार का क्या है अगला कदम?
सरकार अब वक्फ अधिनियम में संशोधन करने जा रही है, जिससे वक्फ बोर्ड को बिना कानूनी जांच के किसी भी संपत्ति पर दावा करने से रोका जा सके।
वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य होगी।
निजी और सरकारी जमीनों पर अवैध दावे करने पर सख्त कार्रवाई होगी।
किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित करने के लिए न्यायिक समीक्षा की आवश्यकता होगी।
निष्कर्ष
किरण रिजिजू का यह बयान वक्फ बोर्ड से जुड़े विवादों को लेकर केंद्र सरकार के रुख को साफ करता है। सरकार अब इस कानून में बदलाव कर पारदर्शिता लाने की कोशिश कर रही है, जिससे अवैध दावों को रोका जा सके। उनका बयान इस बात की ओर भी इशारा करता है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में वक्फ बोर्ड की शक्तियां बेकाबू हो गई थीं, जिन्हें अब नियंत्रित किया जाएगा।