
INTERNATIONAL | क्या आप किसी ऐसे देश की कल्पना कर सकते हैं, जहां सड़कें न हों. रेल मार्ग न हों और लोग कुत्तों की सवारी करते हों. दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां रेलमार्ग नहीं हैं, लेकिन वहां आवागमन के लिए सड़कें हैं. आने जाने के लिए और भी तरीके हैं. लेकिन इस देश में ऐसा कुछ भी नहीं है. यहां परिवहन का मुख्य साधन ऐसी चीजें हैं, जिनके बारे में जानकर आप हैरान होंगे. लेकिन फिर भी हजारों लोग हर साल वहां घूमने के लिए जाते हैं. तस्वीरें आप भी देखेंगे तो मोहित हो जाएंगे. बर्फ से ढंकी वादी आपको अपनी ओर खींचेगी. हम बात कर रहे ग्रीनलैंड की. आर्कटिक का वह इलाका जहां चारों ओर बर्फ जमी रहती है. ग्रीनलैंड एक स्व-शासित देश है लेकिन ऊपरी तौर पर डेनमार्क का उस पर नियंत्रण है. हम बात कर रहे ग्रीनलैंड की. आर्कटिक का वह इलाका जहां चारों ओर बर्फ ही बर्फ है। ग्रीनलैंड क्षेत्रफल के मामले में दुनिया का 12वां सबसे बड़ा देश है और ब्रिटेन से 10 गुना ज्यादा बड़ा है. इसके 20 लाख वर्ग किलोमीटर में सिर्फ चट्टान और बर्फ ही बर्फ हैं. यहां की जनसंख्या सिर्फ 58 हजार है. ग्रीनलैंड में परिवहन काफी अव्यवस्थित है. यहां कोई रेलवे नहीं है. कोई अंतरदेशीय जलमार्ग भी नहीं है, जिसके जरिए आप शहरों के बीच आ जा सकें. वर्तमान में आप सिर्फ छोटे विमानों में ही ग्रीनलैंड की राजधानी नूक जा सकते हैं. ग्रीनलैंड में परिवहन का मुख्य साधन गर्मियों में नाव और सर्दियों में कुत्तागाड़ी है. कुत्तागाड़ी वो स्लेज होता है, जिसे कुत्तों के द्वारा खींचा जाता है. बीते कुछ सालों से यहां हेलीकॉप्टर और प्लेन का प्रयोग ज्यादा होने लगा है. हालांकि, चीन की इस पर नजर है. वह यहां बेस बनाना चाहता है. इतना नहीं, चीन ने आर्कटिक की बर्फ से सामान की आवाजाही के रास्ते बनाने के लिए कई आइसब्रेकर्स भेजे हैं. आइसब्रेकर्स बर्फ पर चलने वाले जहाज हैं, जो यहां के लोगों के लिए काफी मददगार हो सकते हैं. हालांकि, पूरी दुनिया की चिंता इस बात को लेकर है कि इनमें परमाणु शक्ति से चलने वाले आइसब्रेकर्स भी शामिल हैं.
