World Happiness Report 2025: फिनलैंड लगातार आठवीं बार दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना

फिनलैंड लगातार आठवीं बार बना दुनिया का सबसे खुशहाल देश

फिनलैंड लगातार आठवीं बार बना दुनिया का सबसे खुशहाल देश

World Happiness Report 2025: खुशी का स्तर केवल आर्थिक विकास से नहीं तय होता, बल्कि इसमें सामाजिक जुड़ाव और आपसी भरोसे की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वेलबीइंग रिसर्च सेंटर, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025 इसी तथ्य को उजागर करती है। इस रिपोर्ट के अनुसार, फिनलैंड लगातार आठवीं बार दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना हुआ है।

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भारत, पाकिस्तान और अमेरिका की स्थिति

इस साल की रिपोर्ट में 147 देशों की रैंकिंग जारी की गई, जिसमें भारत को 118वां स्थान मिला है। यह पिछले साल के मुकाबले आठ स्थानों का सुधार है, क्योंकि 2024 में भारत 126वें स्थान पर था। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान ने भारत से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 109वीं रैंकिंग हासिल की है।

अमेरिका इस बार अपने सबसे निचले स्थान पर पहुंच गया है, उसे 24वीं रैंकिंग दी गई है, जो 2012 में 11वें स्थान से काफी नीचे है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका में पिछले दो दशकों में अकेले भोजन करने वालों की संख्या में 53 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे सामाजिक जुड़ाव कमजोर हुआ है।

शीर्ष 10 सबसे खुशहाल देश

  1. फिनलैंड
  2. डेनमार्क
  3. आइसलैंड
  4. स्वीडन
  5. नीदरलैंड
  6. कोस्टा रिका
  7. नॉर्वे
  8. इस्राइल
  9. लक्ज़मबर्ग
  10. मेक्सिको

कोस्टा रिका और मेक्सिको पहली बार टॉप 10 में शामिल हुए हैं। इसके अलावा, यूरोप के देशों ने फिर से शीर्ष स्थानों पर अपनी स्थिति बनाए रखी है।

सबसे दुखी देश

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025 में अफगानिस्तान को दुनिया का सबसे दुखी देश बताया गया है। इस सूची में शामिल अन्य सबसे कम रैंकिंग वाले देश इस प्रकार हैं:

  • 146वां स्थान: सिएरा लियोन
  • 145वां स्थान: लेबनान
  • 144वां स्थान: मलावी
  • 143वां स्थान: जिम्बाब्वे

खुशी के कारकों का विश्लेषण

रिपोर्ट में खुशी को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का अध्ययन किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • आर्थिक स्थिति: प्रति व्यक्ति जीडीपी
  • स्वस्थ जीवन प्रत्याशा: लोगों की औसत उम्र और स्वास्थ्य सुविधाएं
  • सामाजिक सहयोग: किसी पर भरोसा करने की क्षमता
  • स्वतंत्रता की भावना: व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निर्णय लेने का अधिकार
  • उदारता: समाज में दयालुता और मदद की प्रवृत्ति
  • भ्रष्टाचार की धारणा: सरकारी और सामाजिक ईमानदारी

विशेषज्ञों के अनुसार, खुशहाली केवल संपत्ति या नौकरी से नहीं आती, बल्कि यह इस पर भी निर्भर करती है कि समाज में परस्पर सहयोग और समर्थन कितना मजबूत है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लोगों के बीच आपसी भरोसे से खुशहाली का स्तर काफी हद तक बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए, नॉर्डिक देशों में यह मान्यता अधिक प्रबल है कि यदि किसी का बटुआ खो जाए, तो कोई उसे वापस लौटा सकता है।

समाज में जुड़ाव का महत्व

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में हर पांचवां युवा सामाजिक समर्थन से वंचित है। 2023 में किए गए सर्वे के अनुसार, 19% युवा वयस्कों ने बताया कि उनके पास कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिस पर वे भरोसा कर सकें। यह 2006 की तुलना में 39% अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि समाज में अकेलापन और अलगाव बढ़ रहा है, जो खुशहाली के स्तर को प्रभावित कर रहा है।

निष्कर्ष: खुशहाली का नया दृष्टिकोण

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025 हमें यह संदेश देती है कि खुशी केवल आर्थिक समृद्धि पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सामाजिक संबंधों और आपसी भरोसे से भी जुड़ी होती है। जब हम अपने परिवार के साथ भोजन करते हैं, दोस्तों की मदद करते हैं या किसी अजनबी पर भरोसा करते हैं, तो हम अपने समाज को अधिक खुशहाल बनाने में योगदान देते हैं।

इस रिपोर्ट से हमें सीख मिलती है कि यदि हम वास्तव में एक खुशहाल समाज बनाना चाहते हैं, तो हमें केवल अर्थव्यवस्था में सुधार पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि आपसी सहयोग, सामाजिक जुड़ाव और सद्भाव को भी बढ़ावा देना चाहिए।