Nirsa News: चिरकुंडा में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम बना औपचारिकता, नहीं पहुंचे अधिकांश शिकायतकर्ता

चिरकुंडा में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम बना औपचारिकता

चिरकुंडा में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम बना औपचारिकता

Nirsa News: सूचना के अभाव में जनता की भागीदारी रही नगण्य, पुलिस आयोजन रह गया फीका

Nirsa News: धनबाद जिले के निरसा अनुमंडल के चिरकुंडा नगर भवन में बुधवार को आयोजित “पुलिस जन शिकायत समाधान कार्यक्रम” जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाया। पुलिस महानिदेशक एवं महानिरीक्षक के निर्देश पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन बनकर रह गया, क्योंकि अधिकांश शिकायतकर्ता कार्यक्रम में शामिल ही नहीं हो सके। आयोजन की विफलता का प्रमुख कारण प्रचार-प्रसार की गंभीर कमी रहा।

Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
WhatsApp Channel Join WhatsApp

सूचना तंत्र की विफलता: न माइकिंग, न प्रचार, जनता रही अनजान

कार्यक्रम की शुरुआत हुई देरी से, स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का उद्देश्य जनता की समस्याएं सुनकर उनका समाधान करना था, लेकिन प्रचार के सीमित साधनों – केवल सोशल मीडिया और कुछेक पोस्टरों – के माध्यम से सूचना दी गई, जिससे क्षेत्र के आम नागरिकों तक इसकी जानकारी ही नहीं पहुंच सकी। ना ही सार्वजनिक माइकिंग हुई, ना ही क्षेत्र में सक्रिय जागरूकता अभियान चलाया गया। नतीजतन, कार्यक्रम 10 बजे के बजाय काफी देर से शुरू हुआ। शुरुआत स्कूली बच्चों के नृत्य कार्यक्रम से हुई, जिसने थोड़ी जीवंतता लाई, लेकिन समग्र रूप से माहौल फीका रहा।

पुरानी शिकायतें अब भी लंबित, जनता का भरोसा डगमगाया

22 जनवरी को की गई शिकायतों का भी नहीं हुआ समाधान

कार्यक्रम में कुछ वही शिकायतकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने 22 जनवरी 2025 को आयोजित पिछले समाधान कार्यक्रम में अपनी समस्याएं दर्ज करवाई थीं, परंतु अब तक कोई समाधान नहीं मिल सका है। इससे कार्यक्रम की गंभीरता और प्रभावशीलता पर प्रश्नचिन्ह लग गया।

महिला सुरक्षा और साइबर क्राइम पर पूछे सवाल

डीएसपी और थाना प्रभारी ने मंच से दी जानकारी, लेकिन श्रोताओं की संख्या रही कम

धनबाद साइबर क्राइम डीएसपी संजीव कुमार एवं चिरकुंडा थाना प्रभारी रामजी राय ने मंच से महिला सुरक्षा और साइबर क्राइम से जुड़े प्रश्नों के जवाब दिए। कुछ स्कूली बच्चों ने मंच पर पहुँचकर उत्सुकता पूर्वक सवाल पूछे, जिसका अधिकारियों ने संतोषजनक उत्तर दिया। इसके बावजूद, नगर भवन की अधिकांश कुर्सियाँ खाली ही रहीं, जिससे स्पष्ट हुआ कि या तो पुलिस व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर हुआ है या फिर सूचना का अभाव प्रमुख कारण बना।