Illegal Coal Mining in Sonardih: सुरंग बनाकर हो रहा अवैध कोयला खनन, स्थानीय जनप्रतिनिधि को बदनाम करने की साजिश!

सुरंग बनाकर हो रहा अवैध कोयला खनन

सुरंग बनाकर हो रहा अवैध कोयला खनन

Illegal Coal Mining in Sonardih: बीसीसीएल एरिया 3 में सोनारडीह ओपी के पीछे अवैध खनन का खेल, पुलिस और माफिया गठजोड़ पर उठ रहे सवाल

Illegal Coal Mining in Sonardih: बीसीसीएल के एरिया-3 अंतर्गत Illegal Coal Mining Sonardih क्षेत्र में एक बार फिर अवैध कोयला कारोबार चर्चा में है। इस बार मामला सिर्फ खनन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक कद्दावर जनप्रतिनिधि को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश भी सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार इस साजिश के पीछे एक शख्स ‘प्रजापति’ का नाम तेजी से उभर रहा है, जिसकी भूमिका को लेकर जल्द बड़ा खुलासा होने की संभावना है।

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सुरंग बनाकर हो रहा खनन, मजदूरों की जान जोखिम में

स्थानीय ग्रामीणों ने खुलासा किया है कि सोनारडीह ओपी के पीछे बंद पड़ी पोखरिया खदान में सुरंग बनाकर अवैध कोयला खनन किया जा रहा है। इन सुरंगों के माध्यम से मजदूरों से अत्यंत खतरनाक हालात में कोयला निकलवाया जा रहा है, जिससे जानमाल का गंभीर खतरा बना हुआ है। अतीत में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जहां सुरंगें धंसने से लोगों की जान चली गई है।

प्रतिदिन 2-3 ट्रकों में होती है तस्करी, पुलिस की भूमिका पर सवाल

सूत्रों की मानें तो इस अवैध खनन में दुर्गेश, मनीष, पंकज और टपु नामक स्थानीय युवक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह गिरोह प्रतिदिन 2 से 3 ट्रकों में कोयले की तस्करी करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस और खनन विभाग की मिलीभगत के बिना इस तरह का संगठित अपराध असंभव है। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

प्रशासनिक चुप्पी या मिलीभगत?

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को प्रति गाड़ी मोटी रकम दी जाती है, जिसके चलते वे जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं। यह मामला न सिर्फ प्रशासन की निष्क्रियता बल्कि न्याय व्यवस्था की चुनौती भी बनता जा रहा है। सवाल उठता है कि जब सब कुछ सामने है, तो कार्यवाही कब होगी? और ‘प्रजापति’ कौन है, जो पर्दे के पीछे से पूरे तंत्र को संचालित कर रहा है?

निष्कर्ष

Illegal Coal Mining Sonardih में केवल अवैध खनन ही नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीति और अपराध का गहरा गठजोड़ सामने आ रहा है। जब तक प्रशासनिक और पुलिस तंत्र की मिलीभगत खत्म नहीं होगी, तब तक मजदूरों की जान जोखिम में डालकर यह काला कारोबार फलता-फूलता रहेगा। अब देखना है कि ‘प्रजापति’ के नाम पर छिपा सच कब सामने आता है और क्या प्रशासन इस अवैध धंधे के खिलाफ कड़ा कदम उठाता है।