Pakistan Supporter: ‘पाकिस्तान समर्थक पोस्ट’ के बाद भड़की हिंसा, उत्तर 24 परगना के बरासात में पुलिसकर्मी घायल

उत्तर 24 परगना के बरासात में पुलिसकर्मी घायल

उत्तर 24 परगना के बरासात में पुलिसकर्मी घायल

सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद बना सड़क पर संघर्ष का कारण

फेसबुक पोस्ट ने भड़काया तनाव

Pakistan Supporter: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बरासात इलाके में मंगलवार देर रात हालात उस समय बेकाबू हो गए जब एक युवक की कथित पाकिस्तान समर्थक फेसबुक पोस्ट ने स्थानीय लोगों के बीच आक्रोश भड़का दिया। तालिखोला इलाके के निवासी शमीम द्वारा डाली गई इस पोस्ट को भारत विरोधी माना गया, जिससे आसपास के इलाके में तनाव फैल गया।

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आरोपी को भीड़ ने घर से निकालकर पीटा

गुस्साई भीड़ ने शमीम और उसके पिता नज़ीर हुसैन को उनके घर से खींचकर पीटा और इलाके में आक्रोश फैल गया। इसके बाद लोगों ने बरासात-बैरकपुर रोड को जाम कर दिया और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे। हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।

पुलिस पर पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा

प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस टीम पर भी भीड़ ने हमला बोल दिया। पथराव के दौरान तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। देर रात तक इलाके में तनाव का माहौल बना रहा।

पुलिस ने की कार्रवाई, गिरफ्तारियां और विरोध

बरासात की पुलिस अधीक्षक प्रतिक्षा झारखड़िया ने बताया कि आरोपी शमीम और उसके पिता को आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा भीड़ में शामिल होकर हिंसा फैलाने और पुलिस पर हमले के आरोप में 13 अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। वहीं, गिरफ्तार किए गए लोगों के परिजन और पड़ोसी देर रात थाने पहुंचे और गिरफ्तारी के खिलाफ धरना देने लगे, जो बुधवार तड़के करीब 3 बजे तक चला।

भारी पुलिस बल की तैनाती, स्थिति नियंत्रण में

फिलहाल बरासात के तालिखोला क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। हालांकि तनावपूर्ण शांति का माहौल बना हुआ है और स्थानीय प्रशासन सोशल मीडिया गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रहा है।

निष्कर्ष

सोशल मीडिया पोस्ट से उभरी संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था की चुनौती

यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल माध्यमों के ज़रिए फैलाए गए विचार कितनी तेजी से सामाजिक अस्थिरता को जन्म दे सकते हैं। बरासात की घटना ने सोशल मीडिया पर निगरानी, धार्मिक भावनाओं की संवेदनशीलता और प्रशासनिक सतर्कता की महत्ता को फिर से उजागर कर दिया है।