Dhanbad News: झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति ने राज्यपाल से की भेंट, बांग्ला शिक्षा और विश्वविद्यालय नामकरण पर रखी मांग

झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति ने राज्यपाल से की भेंट

झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति ने राज्यपाल से की भेंट

Dhanbad News: Jharkhand Banglabhashi Unnayan Samiti Delegation Meets Governor Santosh Gangwar

Dhanbad News: राजभवन में राज्यपाल से की शिष्टाचार मुलाकात

Dhanbad News: 30 मई, शुक्रवार को झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति के केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन, रांची में महामहिम राज्यपाल श्री संतोष गंगवार से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर समिति ने राज्यपाल का पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया और बांग्ला भाषा के संवर्धन से जुड़े अहम मुद्दों को लेकर चर्चा की।

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बनाए रखने की अपील

प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम को सौंपे गए मांग पत्र के माध्यम से आग्रह किया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बिना किसी परिवर्तन के यथावत रखा जाए। उन्होंने बताया कि डॉ. मुखर्जी न केवल एक महान राष्ट्रवादी नेता थे, बल्कि उन्होंने झारखंड के शैक्षिक परिदृश्य को दिशा देने में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई थी।

बांग्ला भाषा की शिक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग

प्रतिनिधियों ने राज्य में प्राथमिक से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक बांग्ला शिक्षा को मजबूती देने की मांग रखी। उन्होंने सुझाव दिया कि बांग्ला माध्यम के लिए पाठ्यपुस्तकों की छपाई और वितरण का कार्य शीघ्र शुरू किया जाए, जिससे बांग्लाभाषी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ हो सके।

बांग्ला भाषा को लुप्त होने से बचाने की जरूरत

समिति ने राज्यपाल को यह स्मरण कराया कि बांग्ला भाषा झारखंड की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता का अहम हिस्सा है। ऐसे में राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह भाषा संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक नीति और संसाधनों की व्यवस्था करे।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे प्रमुख सदस्य

इस महत्वपूर्ण भेंट के दौरान समिति के प्रतिनिधिमंडल में रीना मंडल, काबू दत्ता, राजेश राय, शेताक सेन, आशित चक्रबर्ती, जगतज्योति राय, सजल बैनर्जी और आशीष मंडल जैसे सक्रिय सदस्य शामिल रहे। सभी ने संयुक्त रूप से यह आशा व्यक्त की कि महामहिम राज्यपाल इस विषय में सकारात्मक पहल करेंगे।

निष्कर्ष

झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति राज्यपाल भेंट न केवल एक शिष्टाचार मुलाकात थी, बल्कि बांग्ला भाषा के भविष्य और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर प्रयास भी। समिति को उम्मीद है कि राज्यपाल संतोष गंगवार इस मांग को गंभीरता से लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देंगे और झारखंड में भाषाई समावेशन को सशक्त बनाएंगे।