पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी की 80वीं जयंती पर निकाली गई सद्भावना यात्रा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने किया यात्रा का नेतृत्व

देश के भविष्य की कल्पना के लिए स्व. राजीव गांधी ने की थी कंप्यूटराइजेशन की शुरुआत: जिलाध्यक्ष संतोष सिंह धनबाद/झारखंड:…

दिव्यांग बच्चे भगवान के रूप होते हैं, इनकी सेवा ईश्वर आराधना के समान है – पूर्णिमा नीरज सिंह

Dhanbad: झारखण्ड शिक्षा परियोजना के समावेशी शिक्षा के तत्वावधान में झरिया रिसोर्स सेंटर के प्रांगण में मंगलवार को दिव्यांगता जांच…

फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन और रांची प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय फोटो प्रदर्शनी का हुआ समापन

राज्य स्तरीय फोटो प्रतियोगिता में चंदन पाल को द्वितीय एवं ज्योति को स्पेशल प्राइस धनबाद: फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन और रांची…

विश्व फोटोग्राफी दिवस: कला, तकनीक और आत्म-अभिव्यक्ति का संगम

फोटोग्राफी का इतिहास अत्यंत समृद्ध और रोमांचक है। यह यात्रा 19वीं सदी की शुरुआत में शुरू हुई, जब जोसेफ नाइसफोर नीप्स ने 1826 में दुनिया की पहली फोटोग्राफ बनाई। इसे “हेलीओग्राफ” कहा गया और इसे एक धातु की प्लेट पर केमिकल प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया गया था।

विश्व फोटोग्राफी दिवस:फोटोग्राफरों और फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए समर्पित एक कला का उत्सव

फोटोग्राफी का इतिहास बहुत पुराना है और इसकी शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई थी। पहली तस्वीर खींचने का श्रेय जोसेफ नाइसफोर नीप्स को जाता है, जिन्होंने 1826 में दुनिया की सबसे पुरानी स्थायी फोटोग्राफ बनाई थी। इस तस्वीर को “व्यू फ्रॉम द विंडो एट ले ग्रास” कहा जाता है। इसके बाद, फोटोग्राफी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण खोजें और आविष्कार हुए, जिन्होंने इस कला को और भी विकसित किया।

सुरक्षा पर्व: एक भूला हुआ त्योहार; किस देवता की होती थी पूजा, जानने के लिए पढि़ए पूरा लेख

सुरक्षा पर्व का महत्व उस समय के समाज में अत्यंत बड़ा था। इस पर्व के माध्यम से लोग एक दूसरे के साथ जुड़ते थे और एक दूसरे की सुरक्षा का जिम्मा उठाते थे। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना था।

भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और मजबूती का प्रतीक रक्षाबंधन

इतिहास के पन्नों में रक्षाबंधन का एक और त्योहार था, जो आज के समय में पूरी तरह से गुम हो गया है। इस त्योहार को “सुरक्षा पर्व” कहा जाता था, जिसमें एक समुदाय के लोग एक दूसरे की रक्षा का वचन देते थे। यह त्योहार उस समय मनाया जाता था, जब समाज में बाहरी खतरों का सामना करना पड़ता था। हालांकि, समय के साथ इस त्योहार का महत्व घटता गया और आज इसे बहुत ही कम लोग जानते हैं।

दिव्यांगता जांच शिविर में मगंलवार को बच्चों को मिलेंगे सहायक सामग्री

झरिया। अंचल कार्यालय के समीप स्थित रिसोर्स सेंटर में झरिया प्रखण्ड के सभी 3 से 18 वर्ष के दिव्यांग बच्चो…

Kolkata Doctor Murder Case : घटना के खिलाफ झरिया के लोगों में भी उबाल, कैंडल मार्च निकाल किया घटना का विरोध, फांसी की सजा की मांग

धनबाद। कोलकाता डॉक्टर हत्या के खिलाफ झरिया के लोगो में भी उबाल देखने को मिला। युवाओं ने निकाला कैंडल मार्च,…

अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित 10 वर्षीय नन्हा सिद्धार्थ भगत का अब होगा इलाज, अनुपमा सिंह कि मेहनत लाया रंग

धनबाद । अप्लास्टिक एनीमीया जैसे गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चे को बचाने की पहल राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन की वर्किंग…