बोकारो बंद: लाठीचार्ज में युवक की मौत के बाद तनाव, Jayram Mahato और Shweta Singh के बीच हुआ विवाद

लाठीचार्ज में युवक की मौत के बाद तनाव

लाठीचार्ज में युवक की मौत के बाद तनाव

बोकारो बंद: Bokaro Protest News | Displacement Issue | Youth Death in Lathicharge

बोकारो बंद: 4 अप्रैल 2025 – बीएसएल में नियोजन की मांग को लेकर गुरुवार को हुए प्रदर्शन में पुलिस लाठीचार्ज के दौरान युवक प्रेम महतो की मौत के बाद शुक्रवार को बोकारो बंद का ऐलान किया गया। यह बंद जन संघर्षों और विस्थापितों की पीड़ा को लेकर जनाक्रोश का प्रतीक बन गया है।

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प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज में गई जान, Jayram Mahato ने किया बंद का आह्वान

झारखंड लोक संघर्ष मोर्चा (JLMK) के सुप्रीमो जयराम महतो ने शुक्रवार को बोकारो बंद की घोषणा करते हुए मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने की मांग की। प्रेम महतो की मौत के बाद जैसे ही जयराम महतो घटनास्थल पर पहुंचे, वहां स्थानीय विधायक श्वेता सिंह से उनकी कड़ी बहस हो गई।

Jayram Mahato vs Shweta Singh: मौके पर हुआ तीखा टकराव

घटनास्थल पर पहुंचते ही जयराम महतो और विधायक श्वेता सिंह के बीच राजनीतिक बयानबाजी और टकराव शुरू हो गया।

  • श्वेता सिंह के समर्थकों ने आरोप लगाया कि जयराम महतो यहां राजनीति करने आए हैं, जबकि यह उनका विधानसभा क्षेत्र नहीं है।
  • वहीं, जयराम महतो ने कहा कि वह एक राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते आए हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बोकारो क्षेत्र से 40,000 वोट मिले थे। इसलिए यहां के लोगों के दुःख में शामिल होना उनका दायित्व है।

समर्थकों के बीच झड़प, वाहन क्षतिग्रस्त

विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच हाथापाई हो गई। इसी दौरान जयराम महतो की स्कॉर्पियो का बोर्ड भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। मौके पर स्थिति तनावपूर्ण रही, लेकिन स्थानीय पुलिस ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।

बंद का असर: स्कूल बंद, सड़कों पर सन्नाटा

बोकारो बंद का असर शुक्रवार सुबह से ही दिखाई देने लगा।

  • कई निजी स्कूलों और संस्थानों ने एहतियातन छुट्टी घोषित कर दी।
  • व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी आंशिक रूप से बंद रहे।
  • सड़कों पर आवाजाही कम देखी गई और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए।

विस्थापितों की आवाज बनी जनआंदोलन की लहर

बीएसएल में विस्थापितों के नियोजन की मांग कोई नई बात नहीं है, लेकिन प्रेम महतो की मौत ने इस आंदोलन को एक नया मोड़ दे दिया है। स्थानीय लोग इसे न्याय की लड़ाई मान रहे हैं और पीड़ित परिवार को मुआवजा व सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं।