Dadai Dubey life story: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर दुबे ‘ददई दुबे’ का जीवन परिचय: श्रमिक आंदोलन से लेकर मंत्रीपद तक का सफर
Chandrashekhar Dubey Biography: झारखंड के लोकप्रिय राजनेता और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर दुबे, जिन्हें आमतौर पर ‘ददई दुबे’ के नाम से जाना जाता है, का राजनीतिक और सामाजिक जीवन समर्पण, संघर्ष और जनसेवा से भरा हुआ रहा। वे झारखंड सरकार में मंत्री, इंटक (INTUC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, विधायक और सांसद जैसे अहम पदों पर कार्यरत रहे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्रमिकों और गरीबों के हक की लड़ाई को समर्पित किया।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
चंद्रशेखर दुबे का जन्म गढ़वा जिले के एक सामान्य परिवार में हुआ था। वे बचपन से ही समाज के प्रति जागरूक और न्यायप्रिय स्वभाव के थे। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक कार्यों और मजदूरों के मुद्दों से जुड़े रहे। उनका यह समर्पण आगे चलकर उन्हें एक जननेता के रूप में स्थापित करने में मददगार बना।
राजनीतिक सफर: जमीनी स्तर से विधानसभा और संसद तक
ददई दुबे का राजनीतिक जीवन कांग्रेस पार्टी से शुरू हुआ, जहां उन्होंने विश्रामपुर विधानसभा सीट से छह बार जीत दर्ज कर जनता का विश्वास प्राप्त किया। इसके अलावा वे एक बार धनबाद लोकसभा सीट से सांसद भी चुने गए। वे कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे, जिन्होंने संगठन के लिए न केवल गढ़वा बल्कि पूरे झारखंड में मजबूती से कार्य किया।
मजदूरों के हक में सबसे बुलंद आवाज
चंद्रशेखर दुबे को मजदूरों की आवाज कहा जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और कोल इंडिया, बीसीसीएल, सीसीएल जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के श्रमिकों के लिए कई बार संघर्षरत रहे। उनका उद्देश्य था कि मजदूरों को न्याय, उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा मिले।
झारखंड सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी
ददई दुबे झारखंड सरकार में मंत्री पद पर भी आसीन रहे। मंत्री रहते हुए उन्होंने श्रम, खनन और सामाजिक न्याय से संबंधित विभागों में उल्लेखनीय कार्य किए। वे हमेशा पारदर्शिता और जवाबदेही के पक्षधर रहे और मंत्री रहते हुए आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दी।
जनता से जुड़ाव और सादगी
राजनीति में ऊँचाई पाने के बावजूद ददई दुबे का सादगीपूर्ण जीवन और आम जनता से गहरा जुड़ाव बना रहा। वे हर समय लोगों की समस्याएं सुनते और समाधान का प्रयास करते थे। जनता उन्हें “अपने जैसा नेता” मानती थी।
निधन और शोक
10 जुलाई 2025 में लंबी बीमारी के बाद उनका नयी दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से न केवल कांग्रेस पार्टी को, बल्कि झारखंड की राजनीति और मजदूर आंदोलन को भी अपूरणीय क्षति हुई है।
निष्कर्ष: एक प्रेरणादायक राजनीतिक जीवन
चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे का जीवन संघर्ष, सेवा और नेतृत्व का प्रतीक रहा है। उन्होंने मजदूर वर्ग के अधिकारों की आवाज बनकर राजनीति में जो स्थान हासिल किया, वह आज भी युवा नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके योगदान को झारखंड की जनता और कांग्रेस पार्टी हमेशा स्मरण करेगी।
