Independence Day Special: आजादी के बाद हमें गुलामी से तो आजादी मिली परतंत्रता की बेड़ी कट गई, देश का सारा भू-भाग विदेशी आक्रांताओं से मुक्त हो गया और पूरी दुनिया में हम स्वतंत्र देश के नागरिक कहलाने लगे। हमारी अपनी सांसद, हमारा अपना संविधान, हमारी स्वतंत्र न्यायपालिका, हमारी अपनी कार्यपालिका आजादी के उपरांत ही हमें यह चीजें प्राप्त हुई है।

आजादी के पहले इन तमाम चीजों पर भी बब्रिटिशर्स का पहरा था। इन सब चीजों के अतिरिक्त देश के तमाम वासियों को चाहे वह किसी भी धर्म को मानने वाले हों, किसी पंत में विश्वास रखते हों, किसी भी जाति के हों, अगड़ा हो या पिछड़ा हो, हरिजन हो या आदिवासी हो, अमीर हो या गरीब हो, पढ़ा लिखा हो या बे पढ़ा लिखा हो सभी व्यक्ति को संविधान ने एक वोट का अधिकार दिया और इसी अधिकार के तहत हम अपने वोट का इस्तेमाल करते हैं और देश में सरकार बनाने का काम करते हैं।
हमारे वोट के अधिकार के ताकत से ही सरकार बनती है और बिगड़ती है। यही कारण है की भारत में रक्तहीन सत्ता का बदलाव होता है और कोई अधिनायक वादी प्रवृत्ति भारत पे शासन नहीं कर सकती है सभी प्रकार के प्रवृत्ति के लोगों के लिए हर व्यक्ति को एक वोट का अधिकार दिया जाता है यही वोट का अधिकार हमारे लोकतंत्र का सबसे सुरक्षित हथियार है, जो हमारे लोकतंत्र की रक्षा करते हैं।
हमारे पूर्वजों ने देश को गुलामी से मुक्ति कराई इस मुक्ति के लिए सैकड़ों वर्षों तक उन्होंने संघर्ष किया काला पानी, आजीवन कारावास, फांसी की सजा को हंसते-हंसते झेला लेकिन संघर्ष को जारी रखा और उनके संघर्ष के बदौलत आज की पीढ़ी को आजादी जन्म के साथ ही हासिल हुई।
आजादी के 77 वर्ष पूरे होने का हम सब जश्न मना रहे हैं किंतु इस जश्न के साथ देश के प्रति एक जिम्मेवारी भी हम सबकी है जो चीज हमें पूर्वजों के संघर्ष के कारण विरासत में प्राप्त हुई है हमें अगली पीढ़ी तक इन विरासतों को और मजबूत स्थिति में देश को सौंपना है, जिससे कि आने वाली पीढ़ी हम पर गर्व कर सके जिस प्रकार की आज की पीढ़ी को अपने पूर्वजों पे गर्व है।
हम सब कि सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम अपने संविधान की रक्षा करें, उसमें निहित मौलिक अधिकार की रक्षा करें, न्यायपालिका की रक्षा करें, संसदीय व्यवस्था की रक्षा करें, कार्यपालिका की रक्षा करें और स्वतंत्र प्रेस की ताकत को बचाए रखें और देश की जितनी सवैधानिक संस्थाएं हैं उसे अक्षुण्ण रखें जिससे कि हमारा लोकतंत्र ना सिर्फ स्वस्थ रहे बल्कि चलायमान भी रहे और शहीदों के सपने को पूरा करने में सक्रिय भूमिका भी निभाये।
स्वस्थ लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि हम अपने एक वोट के अधिकार की रक्षा करें, इस अधिकार का सदुपयोग करें, इस अधिकार की रक्षा के लिए हम संघर्षरत रहें क्योंकि लोकतंत्र तभी तक सुरक्षित है जब तक हमारा वोट का अधिकार सुरक्षित है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तमाम शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम अपने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा कर सकें। आज की पीढ़ी के लिए यही सबसे बड़ा संकल्प होगा जो आज हम स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ले सकें।
जय हिंद जय भारत ।
(बिजय कुमार झा)
पूर्व बियाडा अध्यक्ष
कतरास, धनबाद
