Dhanbad News: बाल विवाह केवल परंपरा नहीं, अपराध है: न्यायाधीश मयंक तुषार टोपनो

बाल विवाह केवल परंपरा नहीं, अपराध है

बाल विवाह केवल परंपरा नहीं, अपराध है

Dhanbad News: Dhanbad Launches AASHA Abhiyan to Prevent Child Marriage and Empower Girls

Dhanbad News: बाल विवाह एक सामाजिक अपराध, न कि परंपरा

Dhanbad News: धनबाद सिविल कोर्ट में आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में अवर न्यायाधीश सह सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) मयंक तुषार टोपनो ने बाल विवाह की कुप्रथा पर कठोर संदेश देते हुए कहा कि बाल विवाह केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि भारतीय कानून के अनुसार लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु 18 और लड़कों की 21 वर्ष तय की गई है, और इससे पहले विवाह करने पर न केवल कानून का उल्लंघन होता है बल्कि बच्चों के बचपन और सपनों को भी कुचला जाता है।

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बाल विवाह रोकथाम के लिए “आशा अभियान” की शुरुआत

कार्यक्रम में मयंक तुषार टोपनो ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा “आशा अभियान” शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुरीतियों को जड़ से खत्म करना है। धनबाद जिले के हर प्रखंड व पंचायत में यह अभियान चलाया जा रहा है। डालसा की टीम और झारखंड ग्रामीण विकास ट्रस्ट के संयुक्त प्रयास से इस पहल को साकार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बाल विवाह से प्रभावित किशोरियों को कौशल विकास से जोड़कर मुख्यधारा में लाने का कार्य किया जा रहा है।

न्याय केवल अदालतों में नहीं, समाज में भी ज़रूरी: अजय कुमार भट्ट

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एलएडीसीएस के डिप्टी चीफ अजय कुमार भट्ट ने कहा कि न्याय केवल अदालत तक सीमित नहीं है। हर नागरिक, हर माता-पिता की यह ज़िम्मेदारी है कि वह बाल विवाह के विरुद्ध आवाज़ उठाए। लड़कियों को बोझ नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना होगा। शिक्षा, आत्मसम्मान और जागरूकता ही इस दिशा में पहला कदम है।

बाल विवाह निषेध अधिनियम और कानूनी प्रावधानों पर चर्चा

झारखंड ग्रामीण विकास ट्रस्ट के निदेशक शंकर रवानी ने बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 का ज़िक्र करते हुए बताया कि बाल विवाह कराने वालों को दो साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। पीड़िता को पुनर्वास, शिक्षा और संरक्षण का पूरा अधिकार है। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि बाल विवाह की सूचना पुलिस या बाल संरक्षण अधिकारी को देना उनकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।

सामूहिक प्रयासों से होगा बदलाव

कार्यक्रम में बताया गया कि आशा अभियान के सफल संचालन हेतु प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष टीम गठित की जा रही है, जिसमें कुटुंब न्यायालय, जिला समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, चिकित्सा अधिकारी, पुलिस, और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह टीम बाल विवाह से पीड़ित किशोरियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और पुनर्वास में सहायता करेगी।

जागरूकता में जुटे संगठन और कार्यकर्ता

इस जागरूकता कार्यक्रम में एलएडीसीएस चीफ कुमार विमलेंदु, डालसा सहायक सौरभ सरकार, संतोष कुमार, राजेश सिंह, चंदन कुमार सहित झारखंड ग्रामीण विकास ट्रस्ट की किशोरी लीडर पूजा कुमारी, चंदा कुमारी, दीपा रवानी, जुबेदा ख़ातून, नूरी प्रवीन सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता, फील्ड कोऑर्डिनेटर और पारा लीगल वॉलंटियर उपस्थित रहे।

निष्कर्ष

बाल विवाह रोकथाम अभियान धनबाद समाज में बदलाव की दिशा में एक सशक्त पहल है। इस अभियान के माध्यम से न केवल बाल विवाह जैसे अपराध पर लगाम लगेगी, बल्कि किशोरियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास होंगे। न्यायपालिका, प्रशासन और सामाजिक संगठनों के सामूहिक प्रयास से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि हर बच्चा एक सुरक्षित और सम्मानजनक बचपन प्राप्त करे।