Dhanbad News: धनबाद कोर्ट परिसर में संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन, मानस के चौपाइयों और दोहों पर झूमे अधिवक्ता

धनबाद कोर्ट परिसर में संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन

धनबाद कोर्ट परिसर में संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन

Dhanbad News: एसडीओ कोर्ट कैंपस में वर्षों से प्लास्टिक्स के नीचे बैठकर वकालत करने वाले अधिवक्ताओं को बार एसोसिएशन ने बड़ी सौगात दी। पूरे परिसर में अधिवक्ताओं के बैठने के लिए शेड का निर्माण किया गया जिसका उद्घाटन शनिवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार सहाय एवं महासचिव जितेंद्र कुमार ने किया।

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इस मौके पर अधिवक्ताओं द्वारा शेड में संगीतमय सुन्दर कांड पाठ का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरूआत सुबह ग्यारह बजे राम दरबार के वैदिक पूजन से शुरू हुई . दोपहर 12 बजे से संकटमोचन जागरण ग्रुप के कलाकारों के द्वारा संगीत मय सुंदरकांड का पाठ शुरू किया गया एक से एक धुन पर मानस के चौपाइयों और दोहों का गान किया गया कलाकारों के साथ अधिवक्ताओं ने भी सुन्दरकाण्ड का पाठ किया।

इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि धनबाद के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार तिवारी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी , अवर न्यायाधीश मयंक तुषार टोपनो, रजिस्ट्रार सिविल कोर्ट भी उपस्थित थे. पुर्णहुति के बाद विशाल भंडारा का आयोजन किया गया . इस मौके पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंदर सहाय ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारे आत्मिक और मानसिक बल को सशक्त करने का एक अद्वितीय अवसर है।

सुंदरकांड जो श्रीरामचरितमानस का एक अत्यंत प्रभावशाली अध्याय है न केवल श्रीराम की विजयगाथा का वर्णन करता है, बल्कि संकट में धैर्य, श्रद्धा, सेवा और साहस का जो अनुपम उदाहरण श्री हनुमान जी ने प्रस्तुत किया, वह हम अधिवक्ताओं के जीवन और कार्यशैली के लिए भी अत्यंत प्रेरणास्पद है।इस आयोजन से हमें न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है, बल्कि यह हमारी संस्था, हमारे बार की एकता, सहयोग और सांस्कृतिक चेतना को भी प्रकट करता है।

महासचिव जितेन्द्र कुमार ने कहा कि हम अधिवक्ताओं का जीवन भी एक निरंतर संघर्ष है अन्याय के विरुद्ध न्याय की तलाश का, झूठ के विरुद्ध सत्य की स्थापना का। ठीक वैसे ही जैसे हनुमान जी ने माता सीता की खोज कर श्रीराम के संदेश को लंका तक पहुँचाया, वैसे ही हम अधिवक्ता जनसामान्य की पीड़ा को न्याय के मंच तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। हमें ऐसे धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों को समय-समय पर आयोजित करना चाहिए, ताकि हम केवल पेशेवर नहीं, बल्कि संवेदनशील, सशक्त और संतुलित व्यक्तित्व भी बन सकें।
इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि सुंदरकांड हमें सिखाता है कि जब लक्ष्य बड़ा हो, तो साधन स्वयं मिल जाते हैं। जब संकल्प दृढ़ हो, तो समुद्र भी रास्ता दे देता है। वहीं जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी ने कहा कि जब मन में भक्ति और सेवा का भाव हो, तो असंभव भी संभव हो जाता है।