धनबाद में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन, केंद्र सरकार से की मांग
“सरना धर्म आदिवासियों की आत्मा है। इसे एक अलग धार्मिक पहचान मिलना चाहिए:डबलू महथा
Dhanbad News: झारखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को पहचान दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। खासतौर पर आदिवासी समाज के ‘सरना धर्म’ को एक स्वतंत्र धार्मिक कोड के रूप में मान्यता दिलाने की लड़ाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व में धनबाद में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया।
सरना धर्म कोड की मान्यता के बिना अधूरी जातीय जनगणना
झारखंड मुक्ति मोर्चा की केन्द्रीय समिति के निर्देशानुसार, धनबाद जिला समिति ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार से यह स्पष्ट मांग की कि जातीय जनगणना से पहले ‘सरना धर्म कोड’ को मान्यता दी जाए। झामुमो कार्यकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि बिना सरना धर्म कोड को शामिल किए, आदिवासियों की सही पहचान और उनकी संख्या का सटीक आंकलन संभव नहीं है।
वरिष्ठ नेता डबलू माथा का बयान
धरना के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सदस्य एवं वरिष्ठ नेता डबलू महथा ने कहा, “सरना धर्म आदिवासियों की आत्मा है। इसे एक अलग धार्मिक पहचान मिलना चाहिए। जब तक सरना कोड को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक जातीय जनगणना अधूरी मानी जाएगी। यह हमारे अस्तित्व, संस्कृति और परंपरा की रक्षा की बात है।”
आगे की रणनीति
झामुमो नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने इस मांग की अनदेखी की, तो पूरे राज्यभर में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक करेंगे और जनसहभागिता के माध्यम से आंदोलन को और मजबूती देंगे।
निष्कर्ष
सरना धर्म कोड को लेकर झारखंड में आदिवासी समुदाय की आवाज दिन-ब-दिन बुलंद होती जा रही है। झामुमो का यह प्रदर्शन न सिर्फ राजनीतिक संदेश देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अब आदिवासी समाज अपनी पहचान और अधिकारों को लेकर जागरूक और संगठित हो रहा है।
