Dhanbad News: सरना धर्म कोड की मान्यता की मांग को लेकर झामुमो का धरना प्रदर्शन तेज

सरना धर्म कोड की मान्यता की मांग को लेकर झामुमो का धरना प्रदर्शन तेज

सरना धर्म कोड की मान्यता की मांग को लेकर झामुमो का धरना प्रदर्शन तेज

Dhanbad News: आदिवासी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए झारखंड में उबाल!

सरना कोड की अनदेखी पर चेतावनी, तेज होगा आंदोलन: सूरज महतो

Dhanbad News: सरना धर्म को एक स्वतंत्र धार्मिक कोड के रूप में मान्यता दिलाने की लड़ाई झारखंड में लगातार तेज होती जा रही है। इस संघर्ष को और धार देने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व में मंगलवार को धनबाद में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य आदिवासियों की धार्मिक पहचान को संवैधानिक मान्यता दिलाना है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।

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सूरज महतो ने दिखाई सक्रियता, केंद्र सरकार पर साधा निशाना

इस धरना प्रदर्शन में झामुमो के वरिष्ठ नेता और बाघमारा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी सूरज महतो ने सक्रिय भागीदारी निभाई। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हजारों आदिवासियों ने बलिदान दिया है, लेकिन उनकी धार्मिक पहचान को मान्यता देने की छोटी-सी मांग को केंद्र सरकार लगातार अनदेखा कर रही है। उन्होंने भाजपा की नीति को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा कि यह ‘एक आंख में काजल, दूसरी में सूरमा’ जैसा व्यवहार है।

सरना कोड की अनदेखी पर चेतावनी, तेज होगा आंदोलन

सूरज महतो ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरना कोड को लेकर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में झारखंड का एक-एक बच्चा आंदोलन में भाग लेगा। उन्होंने कहा कि इस मांग को पूरा कराने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि सरकार को आदिवासियों की ताकत का अहसास हो सके। भाजपा की नीति आदिवासियों के अधिकारों को दबाने की रही है, जिसे अब झारखंड कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

केंद्र को भेजे गए दस्तावेज, लेकिन नहीं मिल रहा जवाब

सूरज महतो ने बताया कि सरना कोड की मान्यता के लिए आवश्यक दस्तावेज केंद्र सरकार को पहले ही भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सिर्फ खोखले दावे कर रही है कि वह आदिवासियों के हित में काम कर रही है, जबकि जमीनी सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। उन्होंने दोहराया कि आदिवासियों को उनका हक मिलना चाहिए और सरना धर्म को संविधानिक पहचान दी जानी चाहिए।

निष्कर्ष

सरना धर्म कोड की मान्यता की मांग अब केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और अधिकारों का प्रतीक बन चुकी है। झामुमो के नेतृत्व में इस आंदोलन को जिस तरह जन समर्थन मिल रहा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक होगा। यदि केंद्र सरकार ने समय रहते इस मांग को नहीं माना, तो झारखंड में एक और बड़ा जनांदोलन खड़ा हो सकता है।

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