समान फीस संरचना के लिए बनेगा शुल्क नियामक समिति, झारखंड विधानसभा में पेश होगा ‘फीस रेगुलेशन बिल 2025’
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस में लाया जाएगा एकरूपता
Jharkhand News: झारखंड सरकार ने राज्य के निजी इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट और अन्य प्रोफेशनल संस्थानों में चल रहे पाठ्यक्रमों की फीस को एकसमान और नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में फीस संरचना को लेकर शुल्क नियामक समिति (Fee Regulatory Committee) का गठन किया जाएगा, जो निजी संस्थानों की मनमानी फीस पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगी।
‘झारखंड प्रोफेशनल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (रेगुलेशन ऑफ फीस) बिल, 2025’ को मिली कैबिनेट की मंजूरी
राज्य सरकार इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए ‘झारखंड प्रोफेशनल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (रेगुलेशन ऑफ फीस) बिल, 2025’ नामक विधेयक को राज्य विधानसभा में पेश करेगी। इसका ड्राफ्ट गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पास कर दिया गया। कैबिनेट सचिव वंदना डाडेल ने यह जानकारी दी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब झारखंड ने भी की पहल
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि प्रोफेशनल एजुकेशन में शुल्क निर्धारण पारदर्शी और नियंत्रित होना चाहिए ताकि निजी संस्थान छात्रों से मनमानी फीस वसूली न कर सकें। इस फैसले के बाद कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने पहले ही फीस नियामक समिति का गठन कर लिया था। अब झारखंड ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
कैबिनेट ने अन्य अहम प्रस्तावों को भी दी मंजूरी
इसके अतिरिक्त राज्य कैबिनेट ने कई महत्वपूर्ण फैसलों पर भी मुहर लगाई है—
- झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) को शराब के थोक कारोबार की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि खुदरा बिक्री निजी संचालकों के माध्यम से होगी।
- 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदना योजना में जोड़ा जाएगा।
- एनसीसी कैडेट्स का दैनिक भत्ता 150 से बढ़ाकर 210 रुपए किया गया है।
- मधुपुर शहरी जलापूर्ति योजना के लिए 76 करोड़ रुपए और
- गिरिडीह के बड़कीटांड़-तीनपल्ली-डोकीडीह पथ निर्माण के लिए 55 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।
निष्कर्ष
झारखंड प्रोफेशनल कोर्स फीस नियमन की दिशा में यह कदम न केवल शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता लाएगा, बल्कि गरीब और मध्यम वर्गीय छात्रों को उच्च शिक्षा की पहुंच सुलभ बनाएगा। राज्य सरकार के इस प्रयास से निजी संस्थानों की मनमानी पर रोक लगेगी और छात्रों को एक समान अवसर मिल पाएगा।
