करम पूजा का महत्व
Karam Puja 2025 : करम पूजा आदिवासी समाज का प्रमुख त्योहार है जिसे विशेषकर झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के रिश्ते, परिवार की समृद्धि और फसल की उन्नति के लिए प्रकृति देवता करम देवता की उपासना का प्रतीक है। करम पूजा की मान्यता यह है कि पेड़-पौधे, नदियाँ और धरती हमारी जीवनरेखा हैं और इनके संरक्षण से ही जीवन खुशहाल बनता है।
करम पूजा की परंपरा
करम पूजा के दिन युवक-युवतियाँ उपवास रखते हैं और रातभर जागकर करम गीत गाते हैं। करम पेड़ की डाल को बड़े श्रद्धा भाव से लाकर आंगन या गाँव के चौपाल में स्थापित किया जाता है। महिलाएँ और युवतियाँ मिट्टी के बर्तन में जौ और धान के बीज बोकर उसकी अंकुरित फसल को पूजा स्थल पर सजाती हैं। करम देवता की पूजा करम डाल को जल, दूध और खीर अर्पित कर की जाती है।
करम पूजा और सामाजिक संदेश
यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि यह सामाजिक एकता, भाईचारा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। करम पूजा के दौरान गाँव-समाज एक साथ जुटकर गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से अपनी संस्कृति को जीवित रखते हैं। करम पेड़ की पूजा से हमें यह सीख मिलती है कि पेड़ों की रक्षा करना ही मानवता की रक्षा है।
करम पूजा का आधुनिक महत्व
आज के दौर में जब पर्यावरण प्रदूषण और पेड़ों की कटाई जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं, करम पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि परंपराओं के साथ प्रकृति का संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी है।
