Katras News: केसलपुर कुमारपट्टी के निवासियों ने पुनर्वास की मांग को लेकर किया प्रदर्शन, विस्थापन से पहले पुनर्निर्माण की मांग, महिलाओं का आक्रोश

केसलपुर कुमारपट्टी के निवासियों ने पुनर्वास की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

केसलपुर कुमारपट्टी के निवासियों ने पुनर्वास की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

बीसीसीएल एरिया-4 में महिलाओं ने हक और अधिकार को लेकर किया जोरदार प्रदर्शन

पुनर्वास से पहले मूलभूत सुविधाओं की मांग

Katras News: कतरास (एरिया-4, बीसीसीएल): बीसीसीएल के एरिया-4 अंतर्गत केसलपुर कुमारपट्टी के ग्रामीणों ने, विशेष रूप से महिलाओं ने, सोमवार को एकजुट होकर अपने हक और अधिकार के लिए आवाज बुलंद की। उन्होंने विस्थापन से पहले समुचित पुनर्निर्माण और पुनर्वास की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि जब तक रहने योग्य स्थान, जल, बिजली, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जातीं, तब तक वे अपने घरों को खाली नहीं करेंगी।

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महिलाओं ने उठाई नेतृत्व की जिम्मेदारी

इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें महिलाओं ने नेतृत्व की भूमिका निभाई। हाथों में तख्तियां लेकर उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखा और बीसीसीएल प्रबंधन से पुनर्वास नीति को स्पष्ट करने की अपील की। महिलाओं ने कहा कि बार-बार आश्वासन देकर उन्हें बरगलाया जा रहा है, लेकिन ज़मीन पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

बीसीसीएल पर लगाया अनदेखी का आरोप

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने बीसीसीएल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोल परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए उनके गांव को उजाड़ा जा रहा है, लेकिन उनके भविष्य की कोई चिंता नहीं की जा रही। स्थानीय लोगों ने कहा कि पुनर्वास स्थल पर न तो स्कूल है, न अस्पताल, और न ही रोजगार की कोई व्यवस्था — ऐसे में उनके परिवारों का जीवन संकट में पड़ सकता है।

समाधान की मांग, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

महिलाओं और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे सिर्फ अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं, और पीछे हटने वाले नहीं हैं।

निष्कर्ष

केसलपुर कुमारपट्टी में विस्थापन से पहले पुनर्वास की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब महिलाओं के नेतृत्व में नई दिशा ले रहा है। बीसीसीएल और प्रशासन के लिए यह एक संकेत है कि बिना समुचित पुनर्निर्माण और संवाद के कोई भी परियोजना सफल नहीं हो सकती। ग्रामीणों की मांगें वाजिब हैं और इन्हें जल्द समाधान की ज़रूरत है।