Amar Kumar Bauri ने उठाई आवाज़, बोले – “सूदखोरी मजदूरों को आत्महत्या की कगार तक पहुँचा रही है”
उत्सव भवन में महाजनी प्रथा के विरुद्ध हुई जनचेतना बैठक, BCCL और बैंक अधिकारियों पर भी लगे गंभीर आरोप
Moneylender Harassment in Coalfields: कोयलांचल क्षेत्र में मजदूरों के शोषण और सूदखोरी की समस्या एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने महाजनी प्रथा के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि “सूदखोरों की प्रताड़ना से मजबूर होकर मजदूर आत्महत्या तक कर रहे हैं, जबकि पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।”
उन्होंने कहा कि मजदूरों की खून-पसीने की कमाई को सूदखोर जबरन हड़प ले रहे हैं और इसमें BCCL एवं बैंकों के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत भी पाई जा रही है।
Moneylending Scam in BCCL Areas: 12 एरिया में प्रभारी नियुक्त, बनेगी सूदखोरों की सूची
बैठक में कोयलांचल मजदूर शोषण मुक्ति आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की गई, जिसके तहत BCCL के 12 एरिया में प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। ये प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय सूदखोरों की पहचान कर सूची तैयार करेंगे, जिसे पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय आयोग तक पहुँचाया जाएगा। आंदोलन का उद्देश्य पीड़ित मजदूरों को राहत दिलाना और सूदखोरों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित कराना है।
Amar Kumar Bauri’s Initiative: बनाया गया केंद्रीय समिति, मिलकर लड़ी जाएगी कानूनी और जनसंघर्ष की लड़ाई
इस ऐतिहासिक बैठक की अध्यक्षता बलदेव महतो ने की, जबकि संचालन मीडिया प्रभारी बप्पी बाउरी ने किया। आंदोलन के लिए गठित केंद्रीय समिति में अमर कुमार बाउरी को केंद्रीय संयोजक चुना गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित जन आंदोलन है जो मजदूरों के हक की आवाज़ बनेगा।
Police Inaction and Exploitation: बढ़ते आत्महत्या के मामलों पर जताई चिंता
बाउरी ने प्रशासनिक निष्क्रियता पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “सूदखोरी के जाल में फंसे कई मजदूर आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन आज तक किसी अपराधी को सजा नहीं मिली।” उन्होंने कहा कि ऐसे असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ता जा रहा है, जिससे मजदूरों की ज़िंदगी संकट में है। अब समय आ गया है कि ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई हो।
सामूहिक सहभागिता से होगा संघर्ष: सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति
बैठक में अनेक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे जिनमें प्रमुख रूप से बलदेव महतो, शेखर सिंह, केपी गुप्ता, योगेंद्र यादव, उचित महतो, गौर चंद बाउरी, डबलू बाउरी, और अश्विनी खेत्रपाल आदि शामिल थे। सभी ने इस आंदोलन को जमीनी स्तर पर पहुँचाने की प्रतिबद्धता जताई।
