Nagar Nikay Chunav 2026: ज़्यादातर लोग नगर निकाय चुनावों को “छोटा चुनाव” मानकर हल्के में ले लेते हैं। यही सबसे बड़ी भूल होती है। सच यह है कि नगर निकाय चुनाव सबसे खतरनाक, सबसे अनिश्चित और सबसे निजी चुनाव होते हैं। यहाँ न तो बड़े चेहरे की ढाल काम आती है, न पार्टी की हवा हमेशा साथ देती है।
इन चुनावों में प्रत्याशी सीधे अपने मोहल्ले, अपने पड़ोसी और अपने रोज़मर्रा के रिश्तों के सामने खड़ा होता है। हर वोट किसी जान-पहचान वाले का होता है, और हर विरोध व्यक्तिगत बन जाता है। यही वजह है कि यहाँ हार सिर्फ़ राजनीतिक नहीं होती — सामाजिक और मानसिक भी होती है।
नगर निकाय चुनावों में पैसा सीमित होता है, लेकिन प्रभाव ज़्यादा गहरा। एक छोटी अफ़वाह, एक गलत मीटिंग या आख़िरी 72 घंटों की चूक पूरी बाज़ी पलट सकती है। यहाँ रणनीति पोस्टर से नहीं, मनोविज्ञान, नेटवर्क और समय के सही इस्तेमाल से बनती है।
