Sunita Williams Adaptation: पृथ्वी पर लौटने के बाद सुनीता विलियम्स को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?

Sunita Williams Adaptation

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Sunita Williams Adaptation: अंतरिक्ष से पृथ्वी पर वापसी किसी भी अंतरिक्ष यात्री के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। बुधवार 19 मार्च को भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने साथियों के साथ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सफलतापूर्वक लौट आई हैं। लेकिन पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में लौटने के बाद उन्हें पफी फेस (सूजा हुआ चेहरा), चिकन लेग्स (कमजोर पैर) और धुंधली दृष्टि जैसी समस्याओं से जूझना पड़ेगा। यह सभी प्रभाव अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने के कारण शरीर में होने वाले बदलावों के कारण होते हैं।

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अंतरिक्ष से लौटने पर शरीर में होने वाले बदलाव

1. पफी फेस (सूजा हुआ चेहरा)

अंतरिक्ष में भारहीनता के कारण शरीर में मौजूद तरल पदार्थ समान रूप से वितरित नहीं होते। आमतौर पर, तरल पदार्थ पैरों में जमा होते हैं, लेकिन माइक्रोग्रैविटी में यह सिर और ऊपरी शरीर की ओर बढ़ जाते हैं, जिससे चेहरा सूजा हुआ लगता है। पृथ्वी पर लौटने के बाद, शरीर को दोबारा गुरुत्वाकर्षण के अनुसार ढलने में कुछ समय लगता है, जिससे चेहरा सामान्य आकार में वापस आ जाता है।

2. चिकन लेग्स (कमजोर पैर)

अंतरिक्ष में महीनों तक रहने के दौरान पैरों की मांसपेशियों और हड्डियों पर दबाव नहीं पड़ता, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं। अंतरिक्ष यात्री जब पृथ्वी पर लौटते हैं, तो उनके पैरों की मांसपेशियां पतली और कमजोर हो जाती हैं, जिसे “चिकन लेग्स” कहा जाता है। इसके कारण चलने-फिरने में दिक्कत होती है और कुछ हफ्तों तक उन्हें फिजियोथेरेपी और व्यायाम की जरूरत पड़ती है।

3. धुंधली दृष्टि (ब्लरी विजन)

अंतरिक्ष में रहने के दौरान, इंट्राक्रेनियल प्रेशर (खोपड़ी के अंदर दबाव) बढ़ने से आंखों की नसों पर असर पड़ता है, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है। कई अंतरिक्ष यात्री रिपोर्ट करते हैं कि पृथ्वी पर लौटने के बाद उनकी दृष्टि कुछ दिनों तक साफ नहीं रहती। इस समस्या से उबरने के लिए डॉक्टरों की मदद ली जाती है और समय के साथ यह सामान्य हो जाती है।

पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में दोबारा ढलने की प्रक्रिया

  • अंतरिक्ष यात्री को पृथ्वी पर लौटने के बाद स्पेशल रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम से गुजरना पड़ता है।
  • मांसपेशियों को फिर से मजबूत बनाने के लिए शारीरिक व्यायाम और फिजियोथेरेपी की जाती है।
  • ब्लड सर्कुलेशन सामान्य करने के लिए पोषण और तरल पदार्थों का संतुलित सेवन कराया जाता है।
  • आंखों और तंत्रिका तंत्र की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि देखने की क्षमता सामान्य हो रही है या नहीं

अंतरिक्ष से वापसी की चुनौती क्यों खास है?

सुनीता विलियम्स और उनके साथी करीब 9 महीने 14 दिन तक स्पेस स्टेशन पर रहे। हालांकि, उनका मिशन केवल 8 दिनों का था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण उनकी वापसी में देरी हो गई। इतने लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के बाद पृथ्वी पर लौटना शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है।

अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत की निगरानी क्यों जरूरी है?

स्पेस एजेंसियां यह सुनिश्चित करती हैं कि अंतरिक्ष यात्री न केवल सफलतापूर्वक मिशन पूरा करें, बल्कि वापस आने के बाद वे जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें। NASA और अन्य स्पेस एजेंसियां फिजिकल ट्रेनिंग, मेडिकेशन और साइकोलॉजिकल सपोर्ट प्रदान करती हैं ताकि अंतरिक्ष यात्री तेजी से रिकवर कर सकें।

निष्कर्ष

सुनीता विलियम्स की पृथ्वी पर वापसी जहां एक ऐतिहासिक सफलता है, वहीं यह उनके लिए एक नई चुनौती भी है। अंतरिक्ष में बिताए गए लंबे समय के बाद शरीर को फिर से सामान्य स्थिति में लाने के लिए कई मेडिकल और फिजिकल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। आने वाले हफ्तों में उनकी सेहत में सुधार होगा और वे फिर से अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आएंगी।