Cow is a cow: देसी दूध को लेकर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिकाकर्ता को मिली नसीहत
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को बताया तर्कहीन
Supreme Court on Desi Cow Milk | भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने तिरुपति मंदिर में केवल देसी गाय के दूध के प्रयोग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता द्वारा यह मांग की गई थी कि मंदिर में केवल देसी नस्ल की गायों के दूध का ही उपयोग किया जाए, न कि विदेशी नस्लों के दूध का। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि “गाय, गाय होती है – देसी या विदेशी की बहस तर्कसंगत नहीं है।”
धार्मिक आस्था बनाम व्यावहारिकता पर बहस
यह मामला धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक व्यावहारिकता के बीच टकराव का प्रतीक बन गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि देसी गाय का दूध अधिक पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक है, जबकि कोर्ट ने इस दलील को अतिरेकपूर्ण बताते हुए याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि मंदिर प्रशासन अपने विवेक से दूध के स्रोत का चयन करता है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने स्पष्ट किया कि “हर किसी की व्यक्तिगत आस्था को संविधानिक न्यायिक ढांचे के भीतर ही देखा जाना चाहिए। अदालतें हर धार्मिक धारणा पर सुनवाई नहीं कर सकतीं।” यह बयान धार्मिक मामलों पर बार-बार अदालतों का रुख साफ करता है।
तिरुपति मंदिर प्रशासन की भूमिका
तिरुपति बालाजी मंदिर देश का प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट किया था कि वे स्वास्थ्य मानकों के अनुसार दूध का चयन करते हैं, चाहे वह किसी भी नस्ल की गाय से प्राप्त हो।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय बताता है कि न्यायपालिका धार्मिक आस्थाओं की सीमाओं और व्यावहारिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इस मामले में कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि गाय की नस्ल के आधार पर दूध को लेकर कानूनी दखल की कोई आवश्यकता नहीं है।
