Sindri News: सिंदरी में सीपीआई (एम) कमिटी ने बाबा साहब को दी श्रद्धांजलि

सिंदरी में सीपीआई (एम) कमिटी ने बाबा साहब को दी श्रद्धांजलि

सिंदरी में सीपीआई (एम) कमिटी ने बाबा साहब को दी श्रद्धांजलि

Sindri News: संविधान बचाने का लिया संकल्प, रोहड़ाबांध में आयोजित हुआ माल्यार्पण कार्यक्रम

Sindri News: संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रतीक बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल को सिंदरी में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की ओर से रोहड़ाबांध स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम के माध्यम से अंबेडकर के विचारों को नमन करते हुए वक्ताओं ने संविधान की रक्षा और सामाजिक समानता के लिए एकजुटता की अपील की।

Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
WhatsApp Channel Join WhatsApp

सीपीआई (एम) ने बाबा साहब को किया नमन, सामाजिक न्याय को बताया आज की जरूरत
माल्यार्पण कार्यक्रम की अगुवाई सीपीआई (एम) सिंदरी-बलियापुर लोकल कमिटी के सचिव विकास कुमार ठाकुर ने की। उन्होंने कहा कि आज जब संविधान पर हमले हो रहे हैं, तब बाबा साहब के विचारों को आत्मसात करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और वंचित वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया, जिसे हमें बचाना है।

संविधान को बदलने के प्रयासों का किया विरोध, लिया एकजुट रहने का संकल्प
वक्ताओं ने कहा कि देश में आज संविधान के मूल अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। ऐसे समय में बाबा साहब के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाना और उनके द्वारा बनाए संविधान की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने संविधान की रक्षा का संकल्प लिया।

स्थानीय नेतृत्व और संगठनों की रही सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर सीपीआई (एम) सिंदरी शाखा सचिव गौतम प्रसाद, सूर्य कुमार सिंह, एडवा की अध्यक्ष रानी मिश्रा, सुबल चंद्र दास, आर.के. मिश्रा, रामलाल महतो, नरेंद्र नाथ दास और सुरेंद्र पांडेय जैसे कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित थे। सभी ने बाबा साहब के विचारों को जनआंदोलन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।

समाज के लिए संदेश: अधिकारों की रक्षा और सामाजिक समरसता का संकल्प
इस कार्यक्रम के माध्यम से न सिर्फ डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी गई, बल्कि उनके आदर्शों को अपनाकर एक समतामूलक समाज की दिशा में काम करने का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि बाबा साहब की जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रेरणा और जिम्मेदारी का दिन है।