Sindri News: बाबासाहब अंबेडकर की जयंती को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया गया, प्रो. अनिल रजक ने कहा- “बाबासाहब संघर्ष, ज्ञान और सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं”

बाबासाहब अंबेडकर की जयंती को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया गया

बाबासाहब अंबेडकर की जयंती को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया गया

Sindri News: Prof. Anil Rajak- Babasaheb is not just a name but a symbol of Struggle, Knowledge, and Social Justice

Sindri News: 14 अप्रैल को सिन्दरी में अखिल भारतीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग कर्मचारी समन्वय काउंसिल के द्वारा बाबासाहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जन्म दिवस को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर बाबासाहब के जीवन और उनके संघर्षों को याद करते हुए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और बाबासाहब के विचारों और उनके योगदान पर प्रकाश डाला।

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बाबासाहब: संघर्ष, ज्ञान और सामाजिक न्याय के प्रतीक – प्रो. अनिल रजक
प्रो. अनिल रजक ने बाबासाहब की अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि बाबासाहब केवल एक नाम नहीं हैं, बल्कि वे संघर्ष, सामाजिक न्याय, और ज्ञान के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा है, जिससे हम समाज के वंचित और दबे-कुचले वर्गों के अधिकारों की रक्षा और उनका उत्थान कर सकते हैं।

समारोह में प्रमुख व्यक्तित्वों की उपस्थिति और योगदान
कार्यक्रम की शुरुआत काउंसिल अध्यक्ष सुरेश प्रसाद ने बाबासाहब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की। इसके बाद सभी संगठन के साथियों ने एक-एक करके पुष्प चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रो. बी. एन. राय ने बाबासाहब को भारतीय संविधान के जनक और सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में याद किया। काउंसिल के अध्यक्ष सुरेश प्रसाद ने अपने संबोधन में बाबासाहब के योगदान को सराहते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और फासीवाद के खिलाफ संघर्ष को मजबूत किया।

कार्यक्रम में योगदान देने वाले सहयोगियों का सम्मान
कार्यक्रम को सफल बनाने में विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों का योगदान महत्वपूर्ण था। भाकपा माले के साथी राजीव मुखर्जी, विमल कुमार, अजीत मंडल, राजू सिंह, और अन्य ने कार्यक्रम के आयोजन में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा प्रो. एन. के. सिंह, अमित कुमार, शिवजी यादव, रामप्रसाद जी, महासचिव मदन प्रसाद, नरसिंह राम, नरेश राम, और ओमप्रकाश राम का भी योगदान सराहनीय था।