Aap Jaisa Koi Review: आर माधवन और फातिमा सना शेख की नई फिल्म ‘आप जैसा कोई’ महिला इच्छाओं की बातों में उलझी

आर माधवन और फातिमा सना शेख की नई फिल्म 'आप जैसा कोई' महिला इच्छाओं की बातों में उलझी

आर माधवन और फातिमा सना शेख की नई फिल्म 'आप जैसा कोई' महिला इच्छाओं की बातों में उलझी

Aap Jaisa Koi Review: फीमेल डिज़ायर को दिखाने का साहसी प्रयास, लेकिन कथानक में कमी

Aap Jaisa Koi Review: जुलाई 2025 – आर माधवन और फातिमा सना शेख की बहुचर्चित फिल्म “आप जैसा कोई” (Aap Jaisa Koi) सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म को महिला यौन इच्छाओं (female sexual desire) पर केंद्रित एक साहसी सिनेमाई प्रयोग माना जा रहा था, लेकिन दर्शकों और समीक्षकों की प्रतिक्रियाओं के अनुसार यह फिल्म अपने उद्देश्य को पूरा करने में पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।

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फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक सामान्य शादीशुदा महिला अपनी अधूरी इच्छाओं और भीतरी संघर्षों से जूझती है। माधवन ने एक सहायक लेकिन उलझे हुए पति की भूमिका निभाई है, वहीं फातिमा का किरदार आत्म-मंथन के दौर से गुजरता है। फिल्म की खास बात यह है कि यह विषय को बिना शर्म या डर के प्रस्तुत करती है, लेकिन बहसों और संवादों में इतना उलझ जाती है कि मूल कहानी कहीं खो जाती है।

फिल्म की कमजोर कड़ी बनी लंबी बातचीत और थकी हुई पटकथा

निर्देशक ने फिल्म में यौन स्वायत्तता और सामाजिक पितृसत्ता जैसे मुद्दों को उठाया है, लेकिन पटकथा की धीमी गति, लंबे संवाद और दृश्यात्मक प्रस्तुति की कमी के कारण फिल्म दर्शकों को बांध नहीं पाती। तकनीकी तौर पर फिल्म की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है, लेकिन भावनात्मक गहराई कम महसूस होती है।

प्रदर्शन और कलाकारों की मेहनत सराहनीय

फातिमा सना शेख ने बेहद साहसी और संवेदनशील अभिनय किया है। माधवन की भूमिका सीमित है लेकिन प्रभाव छोड़ती है। संगीत और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के मूड को स्थापित करने में सफल हैं।

निष्कर्ष: साहसी विषय, कमजोर क्रियान्वयन

“Aap Jaisa Koi” एक ज़रूरी विषय को उठाती है, लेकिन उसे परदे पर भावनात्मक जुड़ाव और स्पष्ट दिशा के साथ नहीं उतार पाती। यह फिल्म सोचने पर मजबूर ज़रूर करती है, लेकिन मनोरंजन के मानकों पर थोड़ी कमजोर है।

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