Ambedkar Jayanti Tribute by District Administration: जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को अर्पित की श्रद्धांजलि, आमजन की रही भावपूर्ण उपस्थिति
Ambedkar Jayanti Tribute by District Administration: संविधान निर्माता और भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर सोमवार को धनबाद स्थित अंबेडकर चौक (डीआरएम चौक) पर जिला प्रशासन द्वारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर वरीय पुलिस अधीक्षक श्री हृदीप पी जनार्दनन, उप विकास आयुक्त श्री सादात अनवर, अनुमंडल पदाधिकारी श्री राजेश कुमार, सहायक नगर आयुक्त श्री प्रसून कौशिक समेत अनेक प्रशासनिक अधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
बाबा साहेब के विचारों को याद कर बोले अधिकारी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री जनार्दनन ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबा साहेब एक महान संविधान निर्माता, समाज सुधारक और विद्वान थे। उन्होंने समाज को अंधविश्वास से दूर रहने और ज्ञान प्राप्त कर विवेकशील बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने हमेशा भयमुक्त समाज की कल्पना की और उसी दिशा में कार्य किया।
सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण के अग्रदूत
उप विकास आयुक्त श्री सादात अनवर ने बाबा साहेब के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन दलितों, पिछड़े वर्गों और महिलाओं के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। वे सिर्फ एक कानूनविद नहीं, बल्कि एक प्रख्यात अर्थशास्त्री भी थे। उनके प्रगतिशील विचार आज भी देश को दिशा दे रहे हैं और करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं।
संगठनों और अधिकारियों की भावनात्मक भागीदारी
इस अवसर पर नेशनल फेडरेशन ऑफ अंबेडकर मिशन, धनबाद के अध्यक्ष श्री शशि भूषण कुमार, नगर निगम के मुख्य अभियंता श्री अनूप कुमार सामंता, सिटी मैनेजर श्री विशाल कुमार, सुपरवाइजर श्री चिंटू कुमार, डीआरडीए के श्री मनीष कुमार सहित अनेक विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
अंबेडकर चौक पर दिखा श्रद्धा और समर्पण का दृश्य
बाबा साहेब की जयंती के इस अवसर पर अंबेडकर चौक श्रद्धालुओं से भर गया। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आमजन की बड़ी संख्या में उपस्थिति यह दर्शाती है कि आज भी बाबा साहेब के विचार लोगों के हृदय में जीवित हैं। कार्यक्रम ने सामाजिक एकता और समानता के संदेश को मजबूती से सामने रखा।
