Focus Keyword: जाति जनगणना BJP योजना
Caste Census पर BJP का प्लान: BJP की रणनीति में जातीय गणना को लेकर बढ़ी सक्रियता, आगामी चुनावों से पहले बड़ा संकेत
Caste Census पर BJP का प्लान: देशभर में जाति जनगणना को लेकर चल रही बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस मुद्दे पर अपनी रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। हाल ही में पार्टी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि BJP जातिगत आंकड़ों को लेकर एक नई योजना पर काम कर रही है, जिससे सामाजिक न्याय की दिशा में संतुलित कदम उठाया जा सके। आने वाले समय में पार्टी इस पर कोई बड़ा ऐलान कर सकती है।
विपक्ष के जाति कार्ड के जवाब में BJP की नई रणनीति
2024 लोकसभा चुनाव से पहले बिहार और यूपी जैसे राज्यों में जाति जनगणना को लेकर विपक्षी दलों ने BJP पर दबाव बनाना शुरू किया था। खासकर आरजेडी और कांग्रेस इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और हिस्सेदारी से जोड़कर पेश कर रहे हैं। इन हालातों में BJP अब जातीय आंकड़ों को एक “समाज हित” का हिस्सा बताकर अपनी रणनीति को धार देने की तैयारी में है।
PM मोदी का फोकस “सबका साथ, सबका विकास” पर बरकरार
पार्टी की विचारधारा में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों की मानें तो BJP का मानना है कि यदि जाति आधारित आंकड़ों को सटीक रूप से समझा जाए तो योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। PM नरेंद्र मोदी का फोकस अब भी “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मूल मंत्र पर है, लेकिन सामाजिक संतुलन को लेकर आंकड़ों की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
जातीय आंकड़ों के आधार पर योजनाओं की री-मैपिंग संभव
सूत्रों के अनुसार पार्टी इस दिशा में विचार कर रही है कि यदि सरकार को जातीय आंकड़े औपचारिक रूप से प्राप्त हो जाएं, तो केंद्र और राज्य स्तर की कल्याणकारी योजनाओं को और बेहतर तरीके से डिजाइन किया जा सकता है। इससे वंचित वर्गों को लक्षित करना आसान होगा।
भाजपा की नीति: जाति नहीं, गरीबी प्राथमिकता
हालांकि BJP यह स्पष्ट करना चाहती है कि उसकी नीति जाति के आधार पर राजनीति नहीं करने की है। पार्टी का कहना है कि उसका मूल लक्ष्य “गरीबी हटाओ” और “समावेशी विकास” है, जिसमें जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
सामाजिक न्याय की नई परिभाषा गढ़ने की तैयारी में BJP
जाति जनगणना को लेकर BJP की इस संभावित योजना ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है। जहां एक ओर विपक्ष इसे अपने मुद्दे के रूप में मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर BJP अब इस मुद्दे को “सामाजिक संतुलन और नीतिगत मजबूती” से जोड़कर एक नया नैरेटिव तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में इस पर कोई औपचारिक घोषणा हो सकती है, जो देश की राजनीति में नई दिशा तय कर सकती है।