Dhanbad News: बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें सौंपा गया बाल कल्याण समिति को
Dhanbad News: 27 मई 2025 — धनबाद स्टेशन रोड पर सहायक श्रमायुक्त श्री प्रवीण कुमार के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल ने मंगलवार को बाल श्रमिकों को विमुक्त कराने की प्रभावी कार्रवाई की। इस अभियान में 14 वर्ष से कम आयु के तीन बच्चों को विभिन्न प्रतिष्ठानों से छुड़ाया गया। विमुक्त कराए गए बच्चों को आगे की देखभाल के लिए बाल कल्याण समिति, धनबाद के हवाले कर दिया गया।
दो होटल प्रतिष्ठानों में मिले नाबालिग मजदूर
सहायक श्रमायुक्त ने बताया कि छापेमारी के दौरान स्टेशन रोड पर स्थित कंचन साव की रंगीला हिंदू होटल से एक बालक तथा पंकज कुमार की पटना फेमस लिट्टी दुकान से दो बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया। यह कार्रवाई श्रम कानूनों के तहत बाल श्रम की रोकथाम के उद्देश्य से की गई थी।
बाल श्रम को लेकर प्रशासन की सख्त चेतावनी
धावा दल ने आम नागरिकों और व्यवसायियों से अपील की कि वे 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम न लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रतिष्ठान में बाल श्रमिक पाए जाने पर नियोजक के खिलाफ बाल श्रम निषेध अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर 20 हजार से 50 हजार रुपए तक का जुर्माना और 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा अथवा दोनों हो सकते हैं।
बाल श्रम: एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक समस्या
सहायक श्रमायुक्त प्रवीण कुमार ने कहा कि बाल श्रम की समस्या आज देश के सामने एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती बन चुकी है। इसके पीछे मुख्य कारण गरीबी, निरक्षरता और सामाजिक चेतना की कमी है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा समय-समय पर अनेक कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।
प्रशासन और संस्थाओं का संयुक्त अभियान
इस अभियान में सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के कर्मियों मन्नू कुमार सिंह, उत्तम मंडल, प्रत्यूष कुमार के साथ झारखंड ग्रामीण विकास समिति के नईम अंसारी, जिला समाज कल्याण तथा जिला बाल संरक्षण इकाई धनबाद के सदस्य और पुलिस पदाधिकारी शामिल रहे। यह संयुक्त प्रयास बाल अधिकारों की रक्षा और समाज में जागरूकता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
निष्कर्ष
सामूहिक प्रयास से ही होगा बाल श्रम का समूल निवारण
बाल श्रम के खिलाफ यह कार्रवाई प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व का बेहतरीन उदाहरण है। केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनसहयोग और सामूहिक चेतना से ही इस समस्या को जड़ से मिटाया जा सकता है। समाज का हर व्यक्ति इस दिशा में अपनी भूमिका निभाए, तभी बच्चों का बचपन सुरक्षित रह सकेगा।
