Gomoh News: चड़क पूजा महोत्सव में कीलों से खुद को छलनी कर 40 फीट ऊंचे खंभे पर झूले भोक्ता, शिवभक्ति में डूबा रतनपुर

चड़क पूजा महोत्सव में कीलों से खुद को छलनी कर 40 फीट ऊंचे खंभे पर झूले भोक्ता

चड़क पूजा महोत्सव में कीलों से खुद को छलनी कर 40 फीट ऊंचे खंभे पर झूले भोक्ता

Gomoh News: भुइंया चितरो पंचायत के रतनपुर मंदिर में 50 वर्षों से निभाई जा रही है आस्था की परंपरा

शरीर में कील चुभोकर आस्था की पराकाष्ठा पर पहुँचे भोक्ता

Gomoh News: झारखंड के गोमो स्थित तोपचांची प्रखंड के भुइंया चितरो पंचायत अंतर्गत रतनपुर मंदिर प्रांगण में रविवार को भगवान शिव की अराधना में डूबे श्रद्धालुओं ने अद्वितीय आस्था का परिचय दिया। चड़क पूजा महोत्सव के अवसर पर भोक्तियों ने अपने शरीर में कील चुभोकर 30 से 40 फीट ऊंचे “भोक्ता खुटा” (लोहे के खंभे) पर झूलते हुए भगवान शिव को अपनी भक्ति समर्पित की। यह आयोजन पिछले 50 वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है, जो हर साल भव्यता के साथ संपन्न होता है।

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शिवभक्तों के समर्पण ने किया सबको अभिभूत

इस आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ी और चारों ओर हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे। भक्तों ने पूरे मनोयोग से इस पर्व में भाग लेकर यह साबित कर दिया कि शिवभक्ति के आगे शरीर की पीड़ा भी गौण हो जाती है। कीलों से घायल शरीर और ऊंचे खंभे पर झूलने की यह परंपरा आज भी लोगों के बीच श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक बनी हुई है।

हीरामन नायक ने की गांव की समृद्धि की कामना

इस पवित्र अवसर पर भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश मंत्री एवं जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि हीरामन नायक ने भी आयोजन में भाग लिया। उन्होंने बाबा भोलेनाथ से क्षेत्रवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। नायक ने इस पर्व को गांव की एकता, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताते हुए युवाओं से अपील की कि वे इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाएं ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसकी गरिमा को समझ सकें।

युवाओं को जोड़े रखने का संदेश

श्री नायक ने कहा कि ऐसे पर्व न केवल धार्मिक विश्वास को प्रकट करते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी माध्यम बनते हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इस अनोखी विरासत को आधुनिकता की दौड़ में न खोने दें और इसे जीवित रखने का संकल्प लें।

निष्कर्ष

चड़क पूजा महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की गहराई से जुड़ी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रमाण है। शरीर पर कील चुभाकर खंभे पर झूलना भोक्तियों की भक्ति की चरम सीमा को दर्शाता है। इस आयोजन में भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि ग्रामीण संस्कृति आज भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ी हुई है।