
SINDRI | शुक्रवार को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ १८५७ की लड़ाई को इतिहासकार स्वतंत्रता आंदोलन की पहली लड़ाई मानते हैं, लेकिन इससे दो वर्ष पहले संताल परगना में अंग्रेजों के खिलाफ एक ऐसा विद्रोह हुआ, जिसमें ३० हजार से अधिक संताल आदिवासियों ने कुर्बानी दी। इतिहास के पन्नों में इस संघर्ष को शायद अब तक पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया। सिंदरी में हुल दिवस के अवसर पर अरुण कुमार सिंह जो झारखंड प्रदेश जिक्टा के संगरक्षक सह साशी निकाय के अध्यक्ष ने सिद्दू-कन्नू का ढलाई शेड का शिलापट का अनावरण किया। कार्यक्रम के अंतर्गत आदिवासि निऋत्य का प्रदर्शन किया। सिंदरी विधानसभा के विधायक पत्नी तारा देवी ने सिद्दू-कन्नू के आदम कद मूर्ति पर माल्यार्पण कर चरणों को छू कर सिंदरी विधानसभा के लोगों के शुख-शांति की प्रार्थना की। जन अधिकार मंच के अध्यक्ष रंजीत कुमार ने भी अपने टीम के साथ सिद्दू-कान्नू के मूर्ति पर माल्यार्पण किया।शिलापट एवं माल्यार्पण करनेवालों में भाजपा के नगर महामंत्री इंद्रमोहन सिंह, कुमार राकेश उर्फ मुन्ना, प्रकाश बाउरी, कुमार महतो, धर्मेन्द्र महतो, अशोक महतो, रवि शर्मा, विक्रम सिंह, दीपक रजक आदि उपस्थित थे।
