फिजियोथेरेपिस्ट डॉ मनोज सिंह ने कहा कि डोर-टू-डोर सर्वे में सेरेब्रल पाल्सी, पूर्ण दृष्टिबाधित, अल्प दृष्टिबाधित, क्रोनिक न्यूरोलाजिकल, श्रवण बाधित, अस्थि दिव्यांग, वाक् व भाषा दिव्यांग, कुष्ठ रोग से ठीक हुए दिव्यांग बच्चे, बौद्धिक व मानसिक दिव्यांग, थेलेसिमिया से प्रभावित, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, मस्क्यूलर डिस्ट्राफी, विशिष्ट अधिगम दिव्यांग, बौनापन, एसिड अटैक, सिकल सेल डिसआर्डर, हिमोफीलिया एवं बहुदिव्यंगता वाले बच्चों सहित दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम में वर्णित सभी 21 प्रकार के दिव्यांगता के बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है।