Dhanbad News: एआईआईई के 75वें स्थापना दिवस के प्रवेश पर एलआईसी शाखाओं में संगठन के झंडे का किया गया ध्वजा रोहन

एआईआईई के 75वें स्थापना दिवस के प्रवेश पर एलआईसी शाखाओं में संगठन के झंडे का किया गया ध्वजा रोहन

एआईआईई के 75वें स्थापना दिवस के प्रवेश पर एलआईसी शाखाओं में संगठन के झंडे का किया गया ध्वजा रोहन

Dhanbad News: एआईआईईए के 75 वें स्थापना दिवस में प्रवेश के अवसर पर एआईआईईए के दिशा निर्देशानुसार मंगलवार को बरटांड स्थित एलआईसी शाखा एक समेत भारतीय जीवन बीमा निगम के तमाम शाखा कार्यालय में संगठन के झंडे का ध्वजारोहण किया गया.

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इस अवसर पर तमाम कर्मचारीयों द्वारा एक शपथ ग्रहण भी लिया गया। साथ ही बरटांड शाखा एक के समक्ष आने जाने वाले लोगों को कर्मचारियों द्वारा बटर मिल्क वितरित किया गया।

इस अवसर पर धनबाद के बरटांड शाखा एक में एकत्रित सदस्यों को संबोधित करते हुए बीमा कर्मचारी संघ हजारीबाग मंडल के अध्यक्ष हेमंत मिश्रा ने तमाम सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि एआईआईईए के प्लेटिनम जुबली वर्ष में प्रवेश के क्षणों में प्रथम नमन संघर्षों एवं बलिदान के उस इतिहास को जिसके दम पर 1 जुलाई 1951 को एआईआईईए की स्थापना हो सकी जाहिर है कि उस इतिहास के पन्ने 1 जुलाई 1956 के बाद के पन्नों से ज्यादा कठिनाइयों से भरे होंगे ।

एआईआईईए का जो सार महसूस किया गया वह यह है कि एआईआईईए ने अपने गठन के समय जन व राष्ट्र कल्याण का जो उद्देश्य निर्धारित किया था 74 वर्ष के लंबे सफर में देश – दुनिया के तमाम राजनैतिक,आर्थिक, सामाजिक परिवर्तनों, संगठन में सदस्यों व नेतृत्व की नई पीढ़ियां के बावजूद वह उद्देश्य सीप के मोती जैसा आज तक शुद्ध बना हुआ है। एआईआईईए की स्थापना का मूल उद्देश्य समाज के संसाधन का उपयोग समाज के लिए रहा है।

बीमा क्षेत्र के राष्ट्रीयकरण की मांग की धुरी यही विचार रहा। जनकल्याण के पवित्र विचार में विश्वास की गहराई का सहज उदाहरण एआईआईईए है । हमें गर्व है कि एआईआईईए ने हीं तत्कालीन सरकार को पूरा मसौदा तैयार करके बताया था कि किस तरह देश के साधारण लोगों की छोटी-छोटी बचत से एक राष्ट्रीयकृत बीमा संस्थान बनाकर व्यक्ति व परिवार को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ राष्ट्र के मूलभूत ढांचे हेतु निवेश भी प्राप्त किया जा सकता है।

एआईआईईए ने आर्थिक संलयन की ताकत को समझा व समझाया तथा एलआईसी के इतिहास ने उसे प्रमाणित कर दिया। एआईआईईए ने यह करिश्मा अपने साथियों को दी गई इस बुनियादी शिक्षा से कर दिखाया कि पब्लिक सेक्टर की असली मालिक पब्लिक ही है। उससे ईमानदार वह दोस्ताना व्यवहार रखो।

एलआईसी में ईमानदारी दरअसल एआईआईईए का ही संस्कार है। इमानदारी व प्यार के इस संस्कार ने हम एआईआईईए के साथियों को मुकम्मल इंसान बना दिया।आगे की चुनौतियां भी काम विकट नहीं है सार्वजनिक क्षेत्र में बीमा उद्योग को निजीकरण के उद्देश्य से नीतिगत हमलों का सामना करना पड़ रहा है ।

सुधारो की आड़ में श्रमिकों के अधिकारों को कम करने की कोशिश की जा रही है । इन कठिन समय में जब हमारे देश की सामूहिक नैतिक पहचान दबाव में है, एआईआईईए की विरासत न केवल प्रासंगिक है बल्कि यह अत्यंत आवश्यक भी है। प्लेटिनम जुबली को हमारे उद्योग हमारे अधिकारों की रक्षा और एक जुट के निर्माण के माध्यम से हमारे संघर्ष के क्षेत्र को व्यापक बनाने के लिए तीव्र संघर्षों के लिए एक लॉन्च पैड बनना चाहिए।

एआईआईईए के 75 वें वर्ष को जन -आंदोलन, वैचारिक नवीनीकरण,संघठनात्मक सुदृढ़ीकरण और सामूहिक गौरव का वर्ष बनाएं। इस अवसर पर धनबाद जिले के सभी एलआईसी ऑफिस के द्वार पर ,एआईआईईए का झंडा फहराया गया।