Dhanbad Ring Road Compensation Scam: ACB की बड़ी कार्रवाई, 300 करोड़ के मुआवजा घोटाले में 17 गिरफ्तार

Dhanbad Ring Road Compensation Scam

Dhanbad Ring Road Compensation Scam

रातभर चली छापेमारी, भू-राजस्व विभाग के कर्मचारी और बिचौलिये दबोचे गए

Dhanbad Ring Road Compensation Scam: धनबाद रिंग रोड निर्माण से जुड़े बहुचर्चित मुआवजा घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 17 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गुरुवार देर रात से शुक्रवार सुबह तक चली इस सघन कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। यह मामला जमीन अधिग्रहण के बदले दिए जाने वाले मुआवजे में करीब 300 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा हुआ है।

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10 विशेष टीमों ने एक साथ की छापेमारी

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस कार्रवाई के लिए करीब 10 विशेष टीमों का गठन किया था। इन टीमों ने एक साथ अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर सरकारी कर्मचारियों और बिचौलियों को गिरफ्तार किया। ACB के अनुसार, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच के आधार पर की गई है।

फर्जी कागजात से निकाला गया मुआवजा, रैयतों को नहीं मिला हक

जांच में सामने आया है कि धनबाद रिंग रोड के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले

👉वास्तविक जमीन मालिकों (रैयतों) को मुआवजा नहीं दिया गया

👉फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा राशि की निकासी की गई

👉सरकारी धन का बड़े पैमाने पर अवैध बंदरबांट किया गया

इस घोटाले में भू-राजस्व विभाग से जुड़े कर्मचारी और मुआवजा वितरण में सक्रिय बिचौलियों की संलिप्तता पाई गई है।

2014 से चल रही जांच, कई अधिकारी पहले ही निलंबित

इस गंभीर मामले की जांच वर्ष 2014 में राज्य सरकार ने ACB को सौंपी थी। प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं उजागर होने के बाद तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, लाल मोहन नायक सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था।
अब ताजा गिरफ्तारी को पीड़ितों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

आरोपितों को भेजा जाएगा न्यायिक हिरासत में

ACB सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार सभी आरोपितों की चिकित्सकीय जांच कराई जा रही है, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मामले में आगे भी और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।

एक दशक से न्याय की प्रतीक्षा, कई पीड़ितों की हो चुकी है मौत

मुआवजा नहीं मिलने के कारण कई रैयत पिछले 10 वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। इस लंबी लड़ाई के दौरान छह से अधिक पीड़ितों की मौत हो चुकी है। ACB की ताजा कार्रवाई के बाद पीड़ित परिवारों में एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगी है।

समाजसेवी रमेश राही ने पहले उठाया था मामला

इस घोटाले को उजागर करने में समाजसेवी रमेश राही की भूमिका भी अहम रही है। उन्होंने बताया कि

🔹वर्ष 2013 में इस मुद्दे को उठाया गया

🔹2015 में शिकायत दर्ज कराई गई

🔹2016 में औपचारिक रूप से मामला दर्ज हुआ

रमेश रही ने कहा कि “रिंग रोड जनता की सुविधा के लिए बनाई गई थी, लेकिन जिन रैयतों की जमीन ली गई, उन्हें मुआवजा देने के बजाय भ्रष्टाचार किया गया। अब कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि दोषियों को सजा मिलेगी।”