गौ आधारित सतत विकास को बढ़ावा देने वाली गोशालाओं को मिला प्रोत्साहन
कतरास-करकेन्द की श्री गंगा गोशाला बनी आत्मनिर्भरता और नवाचार का उदाहरण
Dhanbad News: झारखंड गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद और उपाध्यक्ष राजू गिरी ने सोमवार को कतरास-करकेन्द स्थित श्री गंगा गोशाला का दौरा किया। इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने गोशाला में संचालित गतिविधियों जैसे वर्मी कम्पोस्ट निर्माण, गो-कास्ट उत्पाद निर्माण, हरा चारा उत्पादन और गोवंश के सुव्यवस्थित रख-रखाव की सराहना की। आयोग के दोनों शीर्ष अधिकारियों ने गोशाला की कार्यप्रणाली को अनुकरणीय बताते हुए इसे आत्मनिर्भर और टिकाऊ मॉडल का उदाहरण कहा।
आधारभूत ढांचे के विस्तार को लेकर दिया निर्देश
अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने गोशाला परिसर में और बेहतर संरचनात्मक विकास हेतु नवीन प्रस्ताव जल्द आयोग को भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड की गोशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस प्रकार की गतिविधियों का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। आयोग का उद्देश्य है कि हर गोशाला खुद के संसाधनों से टिकाऊ ढंग से संचालित हो सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे।
राज्यस्तरीय सेमिनार में श्री गंगा गोशाला को मिला आमंत्रण
झारखंड गौ सेवा आयोग द्वारा जून 2025 में प्रस्तावित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार में श्री गंगा गोशाला को भी आमंत्रित किया गया है। इस आयोजन में राज्यभर की गोशालाएं भाग लेंगी और अपने कार्यों, उत्पादों व नवाचारों को स्टॉल के माध्यम से प्रदर्शित करेंगी। यह अवसर श्री गंगा गोशाला के लिए अपने प्रयासों को राज्य स्तर पर साझा करने का सुनहरा मंच होगा।
स्थानीय नेतृत्व और सेवा भावना का मिला समर्थन
निरीक्षण के दौरान श्री गंगा गोशाला के महासचिव महेश कुमार अग्रवाल, सचिव दीपक अग्रवाल, कृष्ण कन्हैया राय, कमलेश सिंह, आकाश खंडेलवाल सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे। उन्होंने आयोग के इस दौरे को प्रेरणादायक बताया और भविष्य में गोशाला के कार्यों को और बेहतर बनाने के संकल्प के साथ सहयोग की अपेक्षा जताई।
निष्कर्ष
झारखंड गौ सेवा आयोग के निरीक्षण से गोशालाओं में आया नया उत्साह
झारखंड गौ सेवा आयोग द्वारा श्री गंगा गोशाला का यह निरीक्षण न केवल स्थानीय प्रयासों की सराहना है, बल्कि प्रदेशभर की गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरणा भी देता है। इस पहल से गौ आधारित सतत विकास की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है, जो न केवल गोसेवा बल्कि ग्रामीण विकास, जैविक कृषि और स्वरोजगार के लिए भी अहम साबित हो सकता है।
