FIR Against Baghmara CO: बाघमारा सीओ पर रैयत दिलीप महतो ने दर्ज कराया ऑनलाइन एफआईआर, लगाया रिश्वत और झूठे आरोपों का आरोप

बाघमारा सीओ पर रैयत दिलीप महतो ने दर्ज कराया ऑनलाइन एफआईआर

बाघमारा सीओ पर रैयत दिलीप महतो ने दर्ज कराया ऑनलाइन एफआईआर

FIR Against Baghmara CO: FIR Against Baghmara CO: जमीन विवाद को लेकर महीनों से धरने पर बैठे रैयत ने लगाई न्याय की गुहार

FIR Against Baghmara CO: अपने भूमि संबंधित मामलों के निपटारे की मांग को लेकर लंबे समय से ग्राम स्वराज अभियान के बैनर तले बाघमारा अंचल कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण धरना दे रहे रैयत दिलीप कुमार महतो ने FIR Against Baghmara CO के तहत अंचल अधिकारी बालकिशोर महतो के खिलाफ ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने सीओ पर झूठे बयान देने और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।

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लोकतांत्रिक आंदोलन को बताया गया सरकारी काम में बाधा

दिलीप महतो का आरोप है कि 8 मार्च 2025 को सीओ बालकिशोर महतो ने मीडिया के समक्ष यह दावा किया कि 19 रैयतों में से 17 का काम पूरा हो चुका है, जबकि दिलीप महतो के अनुसार उनके स्वयं के तीन आवेदन आज भी सीओ के लॉगिन आईडी में लंबित हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका कार्य कराने के एवज में अंचल कर्मियों द्वारा एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई, जिसे देने में वह असमर्थ हैं।

धरने के समर्थन में रैयत, लेकिन आरोप में उलझे

दिलीप ने कहा कि वह संविधान और कानून का सम्मान करते हुए लोकतांत्रिक पद्धति से धरना दे रहे हैं, लेकिन सीओ की ओर से उन पर और अन्य रैयतों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने का झूठा आरोप लगाया गया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया।

पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप, अन्य का कार्य पहले किया

दिलीप कुमार महतो ने यह भी आरोप लगाया कि राजगंज मौजा की रैयत राजमणि देवी का आवेदन उनके बाद जमा हुआ, फिर भी उसका कार्य पहले कर दिया गया, जबकि उनके मामलों को जानबूझकर रोका जा रहा है। उन्होंने इसे नियमों का उल्लंघन और प्रशासनिक पक्षपात करार दिया।

बाघमारा थाना प्रभारी से की सीओ पर प्राथमिकी की मांग

दिलीप महतो ने बाघमारा थाना प्रभारी से आग्रह किया कि वे सीओ बालकिशोर महतो के खिलाफ दर्ज की गई ऑनलाइन प्राथमिकी को संज्ञान में लें और उचित कानूनी कार्रवाई करें। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि थाना प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन फोन नहीं लग सका।

निष्पक्ष जांच की जरूरत, उठे प्रशासनिक पारदर्शिता के सवाल

यह मामला सिर्फ एक रैयत की शिकायत नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है। रैयतों को यदि कानूनी तरीके से अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़े, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत है।