February 23, 2024

कतरास: नए साल में हर कोई नई आशा और विश्वास के साथ नए साल को नई संभावना के साथ देखते हैं. इसलिए कई लोग नए वर्ष की शुरुआत पूजा पाठ करके करना चाहते हैं. यदि आप भी पूजा पाठ करके व उत्सव मना के नए साल की शुरुआत करना चाहते हैं, तो आप कतरास कोयलांचल के प्रसिद्ध लिलोरी मंदिर में माँ लिलोरी के दर्शन करके नए साल का एक अच्छा और खुशनुमा शुरूआत कर सकते हैं. स्वागत एक नई शुरुआत की तरह है जिसे सबसे पहले पूजा पाठ करते हैं और मंदिरों की ओर जाते हैं. माँ लिलोरी मंदिर को लोग माँ नीलकंठ वासनी के नाम से भी जानते हैं. कोयलांचल में इस मंदिर कि अपनी एक अलग ही पहचान है. नए साल में यहाँ श्रद्धालुओं और सैलानियों की काफी भीड़ जुटती है. लोगों में ऐसा विश्वास है कि माता लिलोरी के दर्शन मात्र से ही भक्तों के मन्नते पूरी हो जाती है. ऐसा प्रचलन है कि जो भक्त यहाँ मन्नत लेकर आता है वो मंदिर के एक कोने में एक चुनरी गाँठ बांधकर रख देता है और जब उसकी मन्नते पूरी हो जाती है तब उस चुनरी को खोल लेता है. वैसे तो मंदिर में सालों भर सैलानियों और श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. लेकिन नए साल में मंदिर में सैलानियों की भीड़ भाड़ ज्यादा रहती है. इसके अलावा शिवरात्रि, दुर्गापूजा, मकर सक्रांति, कार्तिक पूर्णिमा, शादी विवाह एवं अन्य त्योहारों में भी मंदिर परिसर में काफी भीड़ रहती है. यहाँ बलि प्रथा का भी रिवाज चलता आया है.

800 साल पुराना है मंदिर का इतिहास

मां लिलोरी मंदिर का इतिहास करीब 800 साल का पुराना बताया जाता है. मध्यप्रदेश के रीवा के राज घराने के वंशज से ताल्लुक रखने वाले कतरासगढ़ के राजा सुजन सिंह ने लगभग 800 वर्ष पहले माता की प्रतिमा यहाँ स्थापित की थी. तब से लेकर आज तक पहली पूजा यहां के राज परिवार के सदस्य ही करते हैं. उसके बाद अन्य लोग पूजा पाठ करते हैं। प्रतिदिन यहां पशु(बकरा) बली होती है. अभी मंदिर की देखभाल राज परिवार के चंद्रनाथ सिंह व उनके वंशज कर रहे हैं.

लिलोरी मंदिर को एक अच्छा पिकनिक स्पॉट के रूप में भी जाना जाता है

शादी विवाह व पार्टी के अतिरिक्त पिकनिक मनाने के लिए लिलोरी मंदिर के आसपास का क्षेत्र बहुत ही बेहतरीन है. मंदिर के इधर उधर खाली स्थान है जहाँ खुले आसमान के नीचे पेड़ पौधे के बीच पिकनिक मना सकते हैं. मंदिर परिसर में सुविधा से लैस लगभग 50 धर्मशाला है. जो कि सस्ते लागत में उपलब्ध हो जाता है. आप धर्मशाला में भी पिकनिक मना सकते हैं. मंदिर के चारो ओर चाय, नाश्ता, भोजन, फूल, प्रसाद, खिलौने व अन्य दुकानें हैं.जहाँ आप मनचाहा खरीददारी कर सकते हैं.

कैसे पहुँचे माँ लिलोरी मंदिर


यह मंदिर धनबाद मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है. आप यहाँ आने के लिए रेल मार्ग अथवा सड़क मार्ग का उपयोग कर सकते हैं. रेल मार्ग की बात करें तो धनबाद स्टेशन अथवा गोमो स्टेशन से लोकल ट्रेन के द्वारा निचितपुर हाल्ट या कतरास गढ़ स्टेशन पहुँचे. इसके बाद टोटो के माध्यम से आप 10 -15 मिनट में लिलोरी मंदिर पहुंच सकते हैं. वहीं सड़क मार्ग की बात करें तो धनबाद से बस अथवा ऑटो के द्वारा राहुल चौक कतरास पहुंचे. इसके बाद राहुल चौक से टोटो के द्वारा लिलोरी मंदिर पहुँच सकते हैं. यदि आप नए वर्ष की शुरुआत पूजा पाठ करके शुरू करना चाहते हैं तो पूरे परिवार के साथ नववर्ष में माँ नीलकंठ वासिनी(लिलोरी मंदिर) के दरबार मे हाजिरी अवश्य लगाएं. Viral News

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